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Mohit Subran
nibha dete hain gahri dosti jo haal achchhe hon
nibha dete hain gahri dosti jo haal achchhe hon | निभा देते हैं गहरी दोस्ती जो हाल अच्छे हों
- Mohit Subran
निभा
देते
हैं
गहरी
दोस्ती
जो
हाल
अच्छे
हों
अगर
हो
हाल
ख़स्ता
साथ
तब
कोई
नहीं
देता
रहेंगे
साथ
सारे
हाथ
दोनों
गर
सलामत
हों
मगर
हों
हाथ
टूटे
हाथ
तब
कोई
नहीं
देता
- Mohit Subran
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हालत
जो
हमारी
है
तुम्हारी
तो
नहीं
है
ऐसा
है
तो
फिर
ये
कोई
यारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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नाराज़गी
का
मेरी
ये
आलम
है
इन
दिनों
है
बंद
अपने
आप
से
भी
बोल-चाल
यार
Rajesh Reddy
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दाग़
दुनिया
ने
दिए
ज़ख़्म
ज़माने
से
मिले
हम
को
तोहफ़े
ये
तुम्हें
दोस्त
बनाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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दुनिया
की
नज़रों
में
हम
तो
जोकर
हैं
सबको
ख़ुश
रक्खें
मतलब
वो
जोकर
हैं
ख़त्म
कहानी
कर
के
जब
तुम
ही
ख़ुश
हो
अपना
क्या
है
यार
अपन
तो
जोकर
हैं
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Nadim Nadeem
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वक़्त
ने
छोड़ा
न
इक
हाथ
भी
इन
हाथों
में
ज़िन्दगी
तुझ
को
गुज़ारूँ
तो
गुज़ारूँ
कैसे
Mohit Subran
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गुज़ार
लेते
हैं
जैसे
भी
आप
दिन
लेकिन
ये
हम
ही
जानते
हैं
रात
कैसे
कटती
है
Mohit Subran
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ज़ेहन
ज़ख़्मी
है
बद-ख़यालों
से
बात
गर
नफ़सियाती
की
जाती
Mohit Subran
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किसी
के
पास
जब
बचता
नहीं
है
कोई
भी
रस्ता
फिर
उस
के
पास
बस
इक
आख़िरी
रस्ता
ही
बचता
है
Mohit Subran
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ढूँडता
था
जिसे
अच्छाइयों
में
ग़ैरों
की
देखता
हूँ
वो
बुराई
मिरे
ही
दिल
में
है
Mohit Subran
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