ज़िन्दा हूँ इसलिए के ख़राश-ए-नफ़स चले

  - Amaan mirza
ज़िन्दाहूँइसलिएकेख़राश-ए-नफ़सचले
मैंत्यागदूँहयातअगरमेराबसचले
मैंचढ़गयायेदेखनेऊँचेपहाड़पर
बादलकहाँसेआएकहाँपरबरसचले
परवाज़कररहाहूँमगरकैफ़ियतहैये
जैसेकिसीपरिंदेकेदिलमेंकफ़सचले
हमऐसेचलरहेहैंसनमतेरेसाथसाथ
जैसेघड़ीकीसूइयाँसबपेश-ओ-पसचले
येभीअज़ीज़हैबड़ादिलकशमुआमला
जबसामनेहोहुस्नगुमाँमेंहवसचले
  - Amaan mirza
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