nahin maaloom hai mujhko main kaise she'r kahtaa hooñ | नहीं मालूम है मुझको मैं कैसे शे'र कहता हूँ

  - Amaan mirza
नहींमालूमहैमुझकोमैंकैसेशे'रकहताहूँ
मगरसबलोगकहतेहैंमैंअच्छेशे'रकहताहूँ
मैंपहलेमतलाकहताहूँफिरआगेशे'रकहताहूँ
मेरादिलचाहताहैजितनेउतनेशे'रकहताहूँ
कोईभीहोकहींभीहोमैंजिसकोढूँढताहूँवो
मुझेमिलजाएगाइकदिनसोऐसेशे'रकहताहूँ
कईलोगोंकीमुझसेेयेशिक़ायतहैकिमैंउनसेे
कभीजोपूछताहूँहालपहलेशे'रकहताहूँ
बहुतअच्छानहींहूँमैंबसइकयेमुझ
मेंख़ामीहै
बुराजोमुझकोकहतेहैंमैंउनपेशे'रकहताहूँ
मुझेकोईगिलानइँतुमसेधाँधाँमारतेहोतुम
तुम्हेंफिरक्यागिलामुझसेेअगरचेशे'रकहताहूँ
बतातेहोसभीकेसामनेक्यूँँतन्ज़ियाशायर
तुमपरतंज़कसताहूँतुमपेशे'रकहताहूँ
मुझेभीशौक़थामिसरोंमेंअपनीबातकहनेका
हुनरआयाहैजबसेयेमैंतबसेशे'रकहताहूँ
कईलोगोंकोमैंयूँँभीपसंदआतानहींहूँक्यूँँकि
मैंसच्चेशे'रकहताहूँमैंकड़वेशे'रकहताहूँ
  - Amaan mirza
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