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Divyansh Potter "Masoom"
saajan na aa.e
saajan na aa.e | "साजन न आए"
- Divyansh Potter "Masoom"
"साजन
न
आए"
मेरी
आँखें
तरसने
अब
लगी
है
मेरी
बाहों
को
अकडें
वक़्त
गुज़रा
मेरे
होंठों
पे
पपड़ी
आ
चुकी
है
मेरी
जुल्फ़ों
में
आकर
गर्द
बैठी
मेरे
गालों
की
लाली
लुट
चुकी
है
मेरा
माथा
है
बिन
बिंदी
के
सूना
बहाकर
ले
गए
काजल
को
आँसू
कहीं
खोया
है
छल्ले
का
नगीना
नहीं
बाकी
बचे
पायल
में
घुँघरू
छिली
चूड़ी
की
किरचों
से
कलाई
मेरे
कानों
का
झुमका
खो
गया
है
निगोड़ा
भाग्य
मेरा
सो
गया
है
उलझकर
फट
गई
कांटो
में
चुनरी
मेरे
पावों
ने
कितने
घाव
खाए
हजारों
बारिशें
आकर
गई
पर
मेरे
'सावन',
मेरे
साजन
न
आए
- Divyansh Potter "Masoom"
है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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जब
भी
उस
कूचे
में
जाना
पड़ता
है
ज़ख़्मों
पर
तेज़ाब
लगाना
पड़ता
है
उसके
घर
से
दूर
नहीं
है
मेरा
घर
रस्ते
में
पर
एक
ज़माना
पड़ता
है
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Subhan Asad
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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