teri hasi | तेरी हँसी

  - Manu Sharma
तेरीहँसी
तेराअल्हड़पन
सोचताहुँ
जबबर्फपिघलतीहोगी
किसीपहाड़कीचोटीपर
बनकेनदी
जबबहतीहोगी
वोपहलेतुमसे
मिलतीहोगी
बेफिक्रीमें
बनातीहोगी
अपनारास्ता
जैसेतुमखोई
हुईरहतीहो
ख़ुदमेंही
शायदउम्रका
कोईपड़ाव
तेरीज़िन्दगीमें
उनमैदानोंसाहोगा
जोठहराव
कीलकीरें
तेरेहाथोंमें
बनादेगा
मैंइनपलोंको
सहेजनाचाहताहुँ
पढ़नाचाहताहुँ
तेरीआँखोंको
तेरेचेहरेपर
आनेवाले
हरभावको
औरउन
लकीरोंकोभी
जिन्हें
जानेअनजानेमें
तुमने
अपनीउम्रके
उतार-चढ़ावोंमें
उकेरलियाहोगा
मैंरंगसा
तुझमेंघुलजाना
चाहताहुँ
तुझेसमेटलेनाचाहताहूँ
ख़ुदमें
जबकिमुझेपताहै
तेरेहोनेसेही
मेराहोनाहै
"मनुज"
  - Manu Sharma
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy