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Manoj Devdutt
kuchh ghaav bharne hi nahin denge kabhi
kuchh ghaav bharne hi nahin denge kabhi | कुछ घाव भरने ही नहीं देंगे कभी
- Manoj Devdutt
कुछ
घाव
भरने
ही
नहीं
देंगे
कभी
तूने
दिए
तो
ज़ख़्म
भी
प्यारे
हमें
- Manoj Devdutt
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
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ये
बात
अभी
सबको
समझ
आई
नहीं
है
दीवाना
है
दीवाना
तमन्नाई
नहीं
है
दिल
मेरा
दुखाकर
ये
मुझे
तेरा
मनाना
मरहम
है
फ़क़त
ज़ख़्म
की
भरपाई
नहीं
है
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Vikram Gaur Vairagi
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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चोट
खाई
थी
एक
बार
मगर
उम्र
भर
को
बिखर
गए
हैं
हम
Munazzah Noor
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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आज
फिर
नींद
को
आँखों
से
बिछड़ते
देखा
आज
फिर
याद
कोई
चोट
पुरानी
आई
Iqbal Ashhar
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गीत
लिक्खे
भी
तो
ऐसे
के
सुनाएँ
न
गए
ज़ख़्म
यूँँ
लफ़्ज़ों
में
उतरे
के
दिखाएँ
न
गए
आज
तक
रक्खे
हैं
पछतावे
की
अलमारी
में
एक
दो
वादे
जो
दोनों
से
निभाएँ
न
गए
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Farhat Abbas Shah
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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तुझ
ही
को
मैं
भला
कब
तक
याद
करता
ख़ुद
ही
को
और
कितना
बर्बाद
करता
Manoj Devdutt
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चाय
मैं
वो
और
बारिश
इतनी
है
मेरी
गुज़ारिश
इश्क़
में
देखी
लगाकर
पर
न
चल
पाई
सिफ़ारिश
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Manoj Devdutt
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तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
गदर
मचा
दूँगा
क्या
ख़बर
थी
की
इस
क़दर
मचा
दूँगा
Manoj Devdutt
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ग़म
सभी
अपने
गवारा
करके
ख़ुश
थे
हम
तुझको
सितारा
करके
देखती
थी
वो
मुझे
पर
मैं
ही
तो
बुलाता
था
इशारा
करके
पूछता
है
वो
हमारी
मर्ज़ी
क़त्ल
पर
पहले
हमारा
करके
इश्क़
अब
इक
बार
कब
होता
है
देखना
तुम
भी
दुबारा
करके
साथ
ख़ुद
के
ख़ुश
नहीं
था
इतना
जितना
हूॅं
ख़ुद
को
तुम्हारा
करके
तुम
बनो
मेरा
सहारा
तो
मैं
ख़ुद
को
रखता
बे-सहारा
करके
है
ख़बर
होगा
नहीं
तेरे
बिन
फिर
भी
देखेंगे
गुजारा
करके
लौट
आऊँगा
जहन्नुम
से
मैं
तुम
बुलाना
बस
तुम्हारा
करके
दस्तरस
में
है
तेरे
अब
ये
देव
मस्त
रह
ग़म
से
किनारा
करके
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Manoj Devdutt
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इक
उसने
मुझको
क्या
छोड़ा
है
फिर
मैं
बहुतों
को
छोड़
आया
हूँ
Manoj Devdutt
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