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Manoj Devdutt
kabhi mujhe giraa ke uth nahin sakoge tum
kabhi mujhe giraa ke uth nahin sakoge tum | कभी मुझे गिरा के उठ नहीं सकोगे तुम
- Manoj Devdutt
कभी
मुझे
गिरा
के
उठ
नहीं
सकोगे
तुम
ज़मीं
तुम्हारे
पैर
के
ही
नीचे
की
हूँ
मैं
- Manoj Devdutt
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ग़लती
सब
अपनी
बतानी
पड़
गई
तेरी
इज़्ज़त
यूँँ
बचानी
पड़
गई
हो
रहा
है
ये
अज़ल
से
हर
दफ़ा
आशिक़ों
की
कम
जवानी
पड़
गई
यूँँ
निभाना
पड़
गया
वा'दा
हमें
अपनी
चाहत
ही
गँवानी
पड़
गई
तेरी
हसरत
करनी
थी
पूरी
मुझे
हसरतें
अपनी
दबानी
पड़
गई
बात
तेरी
जो
ग़लत
थी
ख़ुद
मुझे
महफ़िलों
में
वो
दबानी
पड़
गई
जीतकर
हारा
हुआ
हूँ
मैं
उसे
जात
से
बस
मात
खानी
पड़
गई
तू
मिलेगी
ही
नहीं
बस
'देव'
को
रूह
अंदर
से
हटानी
पड़
गई
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Manoj Devdutt
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बंद
खिड़की
खोलना
मुश्किल
है
सच
यहाँ
बोलना
मुश्किल
है
मुंसिफ़ों
की
आँख
पर
पट्टी
है
फिर
बराबर
तौलना
मुश्किल
है
पैर
में
बांधी
गई
है
बेड़ी
फिर
कहाँ
अब
डोलना
मुश्किल
है
हम
मोहब्बत
में
पड़े
हैं
जबसे
ख़ून
तबसे
खौलना
मुश्किल
है
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Manoj Devdutt
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यारी
फ़क़ीरों
से
रखेंगे
अब
दूरी
अमीरों
से
रखेंगे
अब
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जब
कभी
दर्द-ए-सुख़न
देखोगे
उस
में
शायर
को
मगन
देखोगे
जब
सुख़न-वर
का
सुख़न
देखोगे
तुम
मोहब्बत
में
बदन
देखोगे
सब
जहाँ
से
हुक्मराँ
हटवा
दो
चैन
में
तब
हर
वतन
देखोगे
जब
तुम्हें
होगी
मोहब्बत
सच्ची
तब
सभी
करके
जतन
देखोगे
बाद
में
सब
देखना
होगा
पर
प्यार
में
पहले
नयन
देखोगे
जब
कभी
तुम
इंडिया
आओगे
करते
तुम
सबको
नमन
देखोगे
देखा
है
सारा
जहाँ
तुमने
तो
पर
कहाँ
ऐसा
वतन
देखोगे
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Manoj Devdutt
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मरने
का
जब
ख़याल
आया
था
मैंने
ख़याल
फिर
वो
मार
दिया
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