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Manoj Devdutt
shaayri ab nahin banaoonga
shaayri ab nahin banaoonga | शा'इरी अब नहीं बनाऊँगा
- Manoj Devdutt
शा'इरी
अब
नहीं
बनाऊँगा
और
दिल
मैं
नहीं
दुखाऊँगा
जानती
है
नहीं
वफ़ा
दुनिया
फिर
वफ़ा
मैं
नहीं
निभाऊँगा
आँख
उसने
अता
की
है
सबको
राह
फिर
मैं
नहीं
दिखाऊँगा
तू
सता
ले
ख़ुशी
ख़ुशी
मुझको
पर
तुझे
मैं
नहीं
सताऊँगा
डाँट
देगी
मुझे
कभी
जो
माँ
चुप
खड़े
ही
मैं
मुस्कुराऊँगा
- Manoj Devdutt
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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ये
और
बात
कि
इक़रार
कर
सकें
न
कभी
मिरी
वफ़ा
का
मगर
उन
को
ए'तिबार
तो
है
Aleem Akhtar
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कोई
वा'दा
भी
तो
वफ़ा
न
हुआ
बे-वफ़ाओं
से
प्यार
कौन
करे
Ahmad Rahi
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वफ़ा
जिस
से
की
बे-वफ़ा
हो
गया
जिसे
बुत
बनाया
ख़ुदा
हो
गया
Hafeez Jalandhari
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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आसान
नहीं
मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा
भी
मुद्दत
हुई
हम
इस
को
भुलाने
में
लगे
हैं
Hafeez Banarasi
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वफ़ा
नज़र
नहीं
आती
कहीं
ज़माने
में
वफ़ा
का
ज़िक्र
किताबों
में
देख
लेते
हैं
Hafeez Banarasi
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वफ़ा
क्या
कर
नहीं
सकते
हैं
वो
लेकिन
नहीं
करते
कहा
क्या
कर
नहीं
सकते
हैं
वो
लेकिन
नहीं
करते
Muztar Khairabadi
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मेरी
बातों
का
असर
होता
है
क्या
पता
था
इस
कदर
होता
है
आशिक़ों
का
तुम
पता
मत
पूछो
हर
दफ़ा
ये
दर
बदर
होता
है
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Manoj Devdutt
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होंठों
पर
उसके
इक
तिल
था
आया
जिस
पर
मेरा
दिल
था
उसकी
संगत
भारी
पड़ती
अक्सर
बढ़ता
मेरा
बिल
था
जो
भी
उस
सेे
मिलकर
बिछड़ा
वो
तो
मरता
फिर
तिल
तिल
था
दो
नज़रों
से
मारा
करता
ऐसा
इकलौता
क़ातिल
था
जात
अलग
थी,
मेरी
उसकी
फिर
तो
बिछड़ना
मुस्तक़बिल
था
जब
से
उसको
क्या
देखा
है
मनोज
भी
उसका
आमिल
था
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Manoj Devdutt
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रुख़
हवा
का
भी
मोड़
देती
है
क़ैद
ज़ुल्फ़ें
जो
छोड़
देती
है
आशिक़ो
की
उसको
कमी
कब
है
दो
मिनट
में
दिल
तोड़
देती
है
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Manoj Devdutt
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माँ
है
तो
वो
दर्द
पर
मरहम
लगा
देती
है
ज़ख़्म
को
भी
वक़्त
से
पहले
भगा
देती
है
Manoj Devdutt
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तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
गदर
मचा
दूँगा
क्या
ख़बर
थी
की
इस
क़दर
मचा
दूँगा
Manoj Devdutt
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