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Manoj Devdutt
jab uthakar vo nazar dekhenge
jab uthakar vo nazar dekhenge | जब उठाकर वो नज़र देखेंगे
- Manoj Devdutt
जब
उठाकर
वो
नज़र
देखेंगे
फिर
नज़र
से
क़त्ल
कर
देखेंगे
आशिक़ी
तो
बेख़बर
होती
है
हो
के
हम
भी
बेख़बर
देखेंगे
अब
दवाई
ही
न
करती
है
काम
अब
दु'आ
का
हम
असर
देखेंगे
चाँद
इतनी
पास
से
कब
देखा
पर
कभी
तेरी
कमर
देखेंगे
देख
लेंगे
हम
तुम्हें
पूरा
पर
हर
दफ़ा
पर
मुख़्तसर
देखेंगे
इक
गली
मंज़िल
रहेगी
अब
से
तेरी
खिड़की
और
दर
देखेंगे
घर
से
निकले
हो
गया
इक
अर्सा
घूमकर
हम
दर-ब-दर
देखेंगे
ख़ुद
ख़ुदा
देंगे
तुम्हें
मनचाहा
कर्म
का
पहले
शजर
देखेंगे
देखना
है
जो
मना
हम
सबको
काम
करके
वो
मगर
देखेंगे
है
मना
ये
अब
मुझे
पर
हम
तो
अपना
तुझ
में
हम-सफ़र
देखेंगे
- Manoj Devdutt
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मरने
का
जब
ख़याल
आया
था
मैंने
ख़याल
फिर
वो
मार
दिया
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शीशे
में
भी
तू
दिखती
है
मुझको
मुझ
में
अब
मैं
बिल्कुल
बचा
नहीं
हूँ
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Manoj Devdutt
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मैंने
दुआएँ
ही
कमाई
बस
घर
तो
मगर
पैसे
से
चलता
है
Manoj Devdutt
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संघर्ष
की
आग
में
ही
तो
तपा
हूँ
फिर
मैं
कहाँ
कच्ची
मिट्टी
का
घड़ा
हूँ
Manoj Devdutt
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तुम
ख़ुश
हो
तो
ख़ुश
रहना
सीखो
जो
कहना
है
वो
कहना
सीखो
धारा
के
साथी
सब
होते
हैं
तुम
धारा
से
अलग
बहना
सीखो
अजल
से
सहती
आई
है
औरत
अब
तुम
बिल्कुल
मत
सहना
सीखो
औरत
दुनिया
का
गहना
है,
तो
कहना
गहने
को
गहना
सीखो
बस
हसरत
मंजिल
की
रखना
अब
मुश्किल
में
मत
तुम
ढहना
सीखो
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Manoj Devdutt
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