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Manish Yadav
mutaabiq main hawa ke aaj chal ke ja raha hooñ ab
mutaabiq main hawa ke aaj chal ke ja raha hooñ ab | मुताबिक़ मैं हवा के आज चल के जा रहा हूँ अब
- Manish Yadav
मुताबिक़
मैं
हवा
के
आज
चल
के
जा
रहा
हूँ
अब
ख़बर
क्या
ये
हवा
कल
भी
मुवाफ़िक़
चल
सकेगी
क्या
- Manish Yadav
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अपने
होंटों
पर
सजाना
चाहता
हूँ
आ
तुझे
मैं
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
Qateel Shifai
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दो
झुके
नयनों
ने
जो
दिनभर
किया
संवाद
लेकर
मैं
अयोध्या
लौट
आया
लखनऊ
से
याद
लेकर
तीन
झुमका
चार
बोसा
पाँच
झप्पी
आठ
कंगन
रख
दिया
है
पर्स
में
पूरा
अमीनाबाद
लेकर
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Jatin shukla
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प्यार
दो
बार
थोड़ी
होता
है
हो
तो
फिर
प्यार
थोड़ी
होता
है
यही
बेहतर
है
तुम
उसे
रोको
मुझ
सेे
इनकार
थोड़ी
होता
है
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Zubair Ali Tabish
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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फिर
मचलने
लग
गई
हैं
उँगलियाँ
एक
ग़ज़ल
लिख
दूँ
क्या
तेरे
नाम
पर
Dev Niranjan
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झुके
तो
जन्नत
उठे
तो
ख़ंजर
करेंगी
हम
को
तबाह
आँखें
Parul Singh "Noor"
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ये
शहर-ए-अजनबी
में
अब
किसे
जा
कर
बताएँ
हम
कहाँ
के
रहने
वाले
हैं
कहाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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जाते
हुए
कमरे
की
किसी
चीज़
को
छू
दे
मैं
याद
करूँँगा
के
तेरे
हाथ
लगे
थे
Danish Naqvi
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कभी
हम
से
भी
कोई
बात
कीजे
हमें
भी
है
सलीक़ा
गुफ्तगू
का
Meem Alif Shaz
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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नगर
ये
नफ़रतों
का
है
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
न
हो
पाया
किसी
का
वो
हमारा
हो
नहीं
सकता
बचाकर
कुछ
जमापूँजी
बुढ़ापे
के
लिए
रखना
ज़माने
में
यहाँ
कोई
सहारा
हो
नहीं
सकता
तु
ऐसे
मोड़
पे
आकर
मिला
है
मुझको
फिर
से
अब
जहाँ
से
मैं
अभी
तेरा
सहारा
हो
नहीं
सकता
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Manish Yadav
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हयाती
तुम
गई
हो
तेज़
मुझ
सेे
ज़रा
सा
थम
भी
जाना
चाहिए
था
Manish Yadav
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भूल
जाने
में
जिनको
ज़माने
लगे
अब
की
बारिश
में
वो
याद
आने
लगे
यह
गया
है
फ़क़त
एक
ही
रास्ता
फिर
यहीं
दिल
किसी
भी
बहाने
लगे
जब
कभी
भी
सुनाई
दिली
दास्ताँ
लोग
ज़ख़्मों
को
अपने
दिखाने
लगे
इक
नया
घर
बनाने
की
ख़्वाहिश
में
अब
हम
पुरानी
दिवारें
गिराने
लगे
आने
जाने
की
जिनकी
न
रहती
ख़बर
इश्क़
में
वो
ही
मौसम
सुहाने
लगे
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Manish Yadav
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परेशाँ
है
वहाँ
वो
चाँद
भी
कब
से
हुआ
क्या
आज
तुम
छत
पर
नहीं
आए
Manish Yadav
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गए
थे
हम
उनको
बुलाने
वहाँ
पर
न
वो
थे
न
मौसम
सुहाने
वहाँ
पर
उन्हें
बाँहों
में
भरने
की
चाह
में
तब
गुज़ारे
थे
कितने
ज़माने
वहाँ
पर
ख़बर
क्या
परिंदे
फँसे
जाल
में
आ
यूँँ
बिखरे
पड़े
थे
जो
दाने
वहाँ
पर
जो
पूछा
उन्होंने
कि
क्या
काम
है
फिर
लगे
बात
हम
भी
बनाने
वहाँ
पर
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Manish Yadav
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