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Manish Yadav
geet ke KHvaab ya KHvaab ke geet ho
geet ke KHvaab ya KHvaab ke geet ho | गीत के ख़्वाब या ख़्वाब के गीत हो
- Manish Yadav
गीत
के
ख़्वाब
या
ख़्वाब
के
गीत
हो
प्रेम
हो
तुम
मेरे
याकि
तुम
प्रीत
हो
तार
बज
ही
उठे
जब
छुआ
दिल
मेरा
जो
अनोखा
लगे
तुम
वो
संगीत
हो
- Manish Yadav
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ऐसा
है
कि
सब
ख़्वाब
मुसलसल
नहीं
होते
जो
आज
तो
होते
हैं
मगर
कल
नहीं
होते
Ahmad Faraz
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रो
रही
हूँ
कि
तुम
दिख
न
पाए
कहीं
हाए
ये
ख़्वाब
सिंदूर
है
माँग
में
Neeraj Neer
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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न
जी
भर
के
देखा
न
कुछ
बात
की
बड़ी
आरज़ू
थी
मुलाक़ात
की
Bashir Badr
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सुनहरी
लड़कियों
इनको
मिलो
मिलो
न
मिलो
ग़रीब
होते
हैं
बस
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Abbas Tabish
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हम
उसे
आँखों
की
दहलीज़
न
चढ़ने
देते
नींद
आती
न
अगर
ख़्वाब
तुम्हारे
लेकर
एक
दिन
उसने
मुझे
पाक
नज़र
से
चूमा
उम्र
भर
चलना
पड़ा
मुझको
सहारे
लेकर
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Aalok Shrivastav
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कभी
जो
ख़्वाब
था
वो
पा
लिया
है
मगर
जो
खो
गई
वो
चीज़
क्या
थी
Javed Akhtar
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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न
सिर्फ़
ये
कि
जहन्नुम
ख़िताब
में
भी
नहीं
अली
के
मानने
वालों
के
ख़्वाब
में
भी
नहीं
Muzdum Khan
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ख़िज़ाँ
में
अब
बहार
आई
है
फिर
से
हवा
गुलशन
में
लहराई
है
फिर
से
इसे
एहसास
तेरे
जाने
का
है
मिरी
ये
आँख
पथराई
है
फिर
से
मुझे
मिलना
है
फिर
उस
बे-वफ़ा
से
पुरानी
याद
दफ़नाई
है
फिर
से
क़दम
रक्खे
हैं
उसने
फिर
से
बाहर
ये
देखो
शाम
शरमाई
है
फिर
से
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Manish Yadav
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नगर
ये
नफ़रतों
का
है
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
न
हो
पाया
किसी
का
वो
हमारा
हो
नहीं
सकता
बचाकर
कुछ
जमापूँजी
बुढ़ापे
के
लिए
रखना
ज़माने
में
यहाँ
कोई
सहारा
हो
नहीं
सकता
तु
ऐसे
मोड़
पे
आकर
मिला
है
मुझको
फिर
से
अब
जहाँ
से
मैं
अभी
तेरा
सहारा
हो
नहीं
सकता
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Manish Yadav
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मैं
उड़ा
जाता
हूँ
बे-घर
पंछी
सा
जाने
किसके
हिस्से
आना
है
मुझे
Manish Yadav
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वो
दग़ा
करता
रहा
चेहरे
बदलकर
हर
दफ़ा
मैं
उसकी
बातों
में
फॅंसा
हूँ
Manish Yadav
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रंग
अपने
बदल
ही
गई
है
हवा
थामो
आँचल
कि
चल
ही
गई
है
हवा
देखा
उसने
जो
हँसकर
चमन
की
तरफ़
रुत
ख़िज़ाँ
की
बदल
ही
गई
है
हवा
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Manish Yadav
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