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Vijay Anand Mahir
is li.e sab hain talibe jannat
is li.e sab hain talibe jannat | इस लिए सब हैं तालिबे जन्नत
- Vijay Anand Mahir
इस
लिए
सब
हैं
तालिबे
जन्नत
भूख
लगती
नहीं
है
जन्नत
में
- Vijay Anand Mahir
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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नए
साल
में
पिछली
नफ़रत
भुला
दें
चलो
अपनी
दुनिया
को
जन्नत
बना
दें
Unknown
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ग़ज़लें
कहने
में
होती
है
वो
तक़लीफ़
जैसे
के
औरत
को
बच्चा
होता
है
Vijay Anand Mahir
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गर
देखें
तो
ज़ख़्मों
की
हसरत
हो
कुछ
होते
हैं
इतने
प्यारे
पत्थर
Vijay Anand Mahir
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ख़फ़ा
होकर
मैं
जाऊँ
तो,
बनाकर
वो
लब-ओ-रुख़्सार
मुझको
रोक
लेता
है
Vijay Anand Mahir
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जिस
रस्ते
पर
दिल
जाता
है
पैर
हमारा
छिल
जाता
है
इतनी
प्यास
नहीं
है
मुझको
जितना
पानी
मिल
जाता
है
नाविक
चप्पू
धीरे
चलाओ
मछली
का
घर
हिल
जाता
है
बस
उसके
छूने
भर
से
ही
मुरझाया
गुल
खिल
जाता
है
उतनी
ही
यारी
बढ़ती
है
जितना
लंबा
बिल
जाता
है
मैं
तो
घर
ही
में
रहता
हूँ
उस
सेे
मिलने
दिल
जाता
है
माहिर
माहिर
चिल्लाने
से
माहिर
थोड़ी
मिल
जाता
है
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Vijay Anand Mahir
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कुछ
दुश्मन
हैं
साथ
हमारे
भोले
भाले
प्यारे
प्यारे
तुमने
दे
दी
उतनी
चादर
हमने
जितने
पैर
पसारे
इस
सेे
अच्छा
इश्क़
ही
करते
दर
दर
फिरते
मारे
मारे
चीख़
रहे
थे
भूखे
बच्चे
माँ
ने
अपने
अश्क
बघारे
कोई
मुझको
क्या
लूटेगा
खोल
चुका
हूँ
ताले
सारे
उसने
ऐसा
खेल
रचाया
जितने
भी
थे
माहिर
हारे
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Vijay Anand Mahir
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