zaraa thehro sunaane ko haseen naghmaat baaki hain | ज़रा ठहरो सुनाने को हसीं नग़्मात बाक़ी हैं

  - MAHESH CHAUHAN NARNAULI
ज़राठहरोसुनानेकोहसींनग़्मातबाक़ीहैं
बयाँकरनेकोइसदिलकेकईजज़्बातबाक़ीहैं
अभीसेचलदिएसुनकरअधूरीदास्ताँलोगों
अभीखुलनेहमारेक़ीमतीसफ़्हातबाक़ीहैं
अदब,तहज़ीबसबकुछभूलबैठीहैंनईनस्लें
जानेदेखनेकोऔरक्याहालातबाक़ीहैं
ज़रा-सीबूँदसेगिरनेलगाहैयेमकाँमेरा
अभीसावनकेमौसमकीकईबरसातबाक़ीहैं
  - MAHESH CHAUHAN NARNAULI
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