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Lekhak Suyash
ek aur saal jee gaya
ek aur saal jee gaya | एक और साल जी गया
- Lekhak Suyash
एक
और
साल
जी
गया
है
तिरा
ख़याल
तेरे
बिन
एक
और
एक
जनवरी
एक
और
साल
तेरे
बिन
- Lekhak Suyash
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ग़ैरतों
के
मसअले
थे
ख़्वाब
हम
पर
हँस
रहे
थे
जब्र
ये
था
संग
था
वो
और
हम
तो
आइने
थे
इश्क़
ही
तो
ज़िंदगी
है
कितने
प्यारे
तज़्किरे
थे
साथ
रहना
इश्क़
करना
ये
तिरे
ही
मशवरे
थे
इक
तिरे
होने
ही
भर
से
मुझ
में
कितने
हौसले
थे
ख़्वाब
की
ता'बीर
ये
है
दूर
थे
वो
जो
सगे
थे
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Lekhak Suyash
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ख़ंजर
चाक़ू
ताक
रहे
थे
कोने
से
क़ाहिर
ने
बाँहों
में
भर
कर
मार
दिया
Lekhak Suyash
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नस्ल
थे
हम
वो
कि
जिसने
गाँव
तो
देखे
न
थे
शहर
था
इक
वो
भी
अब
तो
जाँ-सिताँ
सा
हो
गया
Lekhak Suyash
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पास
से
गुज़रे
तिरे
रोया
बहुत
दिल
हाल
क्या
लेते
तिरा
बेहाल
थे
हम
Lekhak Suyash
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आसान
हुनर
था
जीते
जाना
पर
आसाँ
काम
नहीं
करता
मैं
Lekhak Suyash
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