zindagi ka mas'ala samjha nahin | ज़िंदगी का मसअला समझा नहीं

  - Lalit Mohan Joshi
ज़िंदगीकामसअलासमझानहीं
मुझकोजीनेकाहुनरआतानहीं
मैंनहींसोयाकईरातोंसेपर
मैंमगरयेबातबतलातानहीं
अबजिसेलानाहैलेआओयहाँ
बादउसकेमुझ
मेंतोमुझसानहीं
वोतोबगियाहैगुलाबोंकीयहाँ
मुझसेेइकपौधासँभलपातानहीं
क्यूँबरसताग़मयूँँबेमौसमयहाँ
सोतुझेग़मऔरकुछआतानहीं
उसकेछूकरजानेकेकुछबादफिर
ऐसेमैंउलझाकिफिरनिकलानहीं
  - Lalit Mohan Joshi
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