mujhe aflaak par ik ghar banaana hai | मुझे अफ़लाक पर इक घर बनाना है

  - Lalit Mohan Joshi
मुझेअफ़लाकपरइकघरबनानाहै
ज़मींकोछोड़करउसघरमेंजानाहै
ख़तामुझकोहैझूठेशाइरोंसेअब
ग़ज़लकीउम्रकोउनसेेबचानाहै
मुझेजाकरख़यालीमहफ़िलोंमेंफिर
ग़ज़लकीख़ूबियोकोगुनगुनानाहै
मैंजिनकाकामकरताहूँयहाँहररोज़
चलोफिरअबउन्हींकोआज़मानाहै
ज़मींमेंफलरहीजोबेटियोंकोअब
सितारोंसाउन्हेंतोजगमगानाहै
थकनचलनेमेंमानाहोरहीहमको
मगरहमकोऐसेडगमगानाहै
होकोईभीअच्छाराब्तातोक्या
मगरहमकोसभीसेदिलमिलानाहै
नहींगरदादहमकोमिलरहीहैआज
हमेंबसचारदिनयेदुखउठानाहै
दुनियामेंमिलाजोनामवोयारो
ललितकोशा'इरीमेंअबकमानाहै
  - Lalit Mohan Joshi
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