ग़ुरूर-ए-हुस्नक्यूँइतनानहींयेबातअच्छीहै
बजीकुछतालियोंनेज़ातउसकीतोबताईहै
वोहैकमज़ोरकितनायेसमझमेंआगयाहमको
हक़ीक़तयारउसनेअपनीऐसेहीदिखाईहै
तुम्हारीकामयाबीकेतोचर्चेचारदिनहोंगे
मगरइकदिनतुम्हारीतोकहानीख़त्महोनीहै
हिदायतयारतुमकोहैफ़क़तख़ुदपरअमलकरना
समयरहतेतोअक्सरयारबिगड़ीबातबनतीहै
अगरज़िंदाहोतोज़िंदादिलीकेसाथजीनाहै
ग़ज़लतुमकोललितकीयारबसइतनासिखातीहै