ghar ke jaalon ko mujhe aise hatana hai | घर के जालों को मुझे ऐसे हटाना है

  - Lalit Mohan Joshi
घरकेजालोंकोमुझेऐसेहटानाहै
रोज़ग़मकेदरियामेंजैसेनहानाहै
बंदिशोंसेहाथऐसेअबछुड़ानाहै
पंछियोंजैसेमुझेअबचहचहानाहै
कामख़ुदपेमैंकरूँँगादेखनायारो
अबबुरीसबआदतोंसेबाज़आनाहै
दरमियाँरिश्तोंकेहैदीवारआतीदो
इकअनातोदूसरारोना-रुलानाहै
इकमुकम्मलजोग़ज़लताज़ाहुईहैकल
इसलिएफिरआपकोअबबौखलानाहै
मैंनेफूलोंकीहिफ़ाज़तकालियाज़िम्मा
रोज़यानीआपनेफिरआज़मानाहै
ज़िंदगीकाइकयहीदस्तूरहैयारो
सामनेसबकेयहाँहँसना-हँसानाहै
टूटतीउम्मीदहरदिनआपकीमाना
परललितउम्मीदकाइकआशियानाहै
  - Lalit Mohan Joshi
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