dekho vo qaasid mira gham la raha hai | देखो वो क़ासिद मिरा ग़म ला रहा है

  - Lalit Mohan Joshi
देखोवोक़ासिदमिराग़मलारहाहै
ठीकघरकेवोपतेपररहाहै
क्यूँलिखूँमैंअबजवाब-ए-तल्ख़उसको
बसलबोंसेशुक्रियाहीरहाहै
अश्कलिखकरउसकोभेजेयारकैसे
हर्फ़काग़ज़सारेखाताजारहाहै
वोदिवानाअबनहींजाताकहींहै
बसपतेक़ासिदकेवोअबजारहाहै
यारहाल-ए-दिलसभीलिखकरसुनोफिर
ख़तकोदेनेउसकेघरवोजारहाहै
हालकासाहबललितकेअबकहेंक्या
दोस्तअबक़ासिदहीबनताजारहाहै
  - Lalit Mohan Joshi
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