ham ko kaafi nahin hai shaakh se jhadne ka sukoon | हम को काफ़ी नहीं है शाख़ से झड़ने का सुकून

  - Kunal Barkade
हमकोकाफ़ीनहींहैशाख़सेझड़नेकासुकून
चाहिएपत्तोंकोबसमिट्टीमेंसड़नेकासुकून
काफ़ीकमहोतीहैअबबातकेबननेकीख़ुशी
अबमुझेहोताहैबसबातबिगड़नेकासुकून
सारेछूटेहुएहाथोंकीवोभरपाईहै
सामनेसबकेतेरेहाथपकड़नेकासुकून
मौसम-ए-हिज्रमेंहरबारकिसीसेमिलना
मौसम-ए-इश्क़मेंफिरउससेेबिछड़नेकासुकून
यूँँमोहब्बतसेमुझेदेखनाउसकाऔरफिर
लोगोंकीआँखोंमेंइसबातकेगड़नेकासुकून
हममुसाफ़िरहैंहमारीख़ुशीघरमेंनहींहै
बसगएतोहमेंयादआयाउजड़नेकासुकून
अबझगड़ेशिकायतकोईबहसकुनाल
हाएउसशख़्ससेहरबातपेलड़नेकासुकून
  - Kunal Barkade
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