ham jo apne ghar men khulkar ro pade | हम जो अपने घर में खुलकर रो पड़े

  - Kumar Aryan
हमजोअपनेघरमेंखुलकररोपड़े
सुनतेहींसारेसितमगररोपड़े
एकमुद्दतहोचुकीथीबिनमिले
मिलतेहीभाईसहोदररोपड़े
देखकरइकवीरकीबेवाकोतो
हाथकीचूड़ीमहावररोपड़े
चाकदामनइसतरहमेराहुआ
सीतेसीतेहीरफ़ूगररोपड़े
घरमेरेआएहुएमेहमानसब
देखकरकेटूटीछप्पररोपड़े
जिसकोपानेकेलिएरोतेथेहम
जबउसेपायातोपाकररोपड़े
आदमीकोआदमीकैसेकहें
देखकरजिसकोपयम्बररोपड़े
क्याशिकायतहोज़मानेभरकीजब
सरलगेअपनोंकेपत्थररोपड़े
नज़्मऐसीथीमियाँकेक्याकहें
बज़्ममेंसारेसुख़न-वररोपड़े
  - Kumar Aryan
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