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Divya 'Kumar Sahab'
saath tu nahin to is shaam ka karoon main kya
saath tu nahin to is shaam ka karoon main kya | साथ तू नहीं तो इस शाम का करूँँ मैं क्या
- Divya 'Kumar Sahab'
साथ
तू
नहीं
तो
इस
शाम
का
करूँँ
मैं
क्या
फ़ोन
में
पड़े
इस
पैग़ाम
का
करूँँ
मैं
क्या
चैट
कॉल
कर
सकते
हैं
नहीं
कभी
तुझको
वाट्सप
का
और
इंस्टाग्राम
का
करूँँ
मैं
क्या
- Divya 'Kumar Sahab'
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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बाल
मेरे
दिख
रहे
जो
ख़्वाब
बिखरे
हैं
मेरे
अब
बना
लूँ
बाल
मैं
अपने
मगर
किसके
लिए
Divya 'Kumar Sahab'
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इस
बंजर
का
तुम
हल
बनके
बरसोगे
कब
तुम
जल
बनके
तुम
याद
करो
मैं
निकलूँगा
परछाई
से
हलचल
बनके
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Divya 'Kumar Sahab'
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हम
होते
भी
इक
कैसे
फिर,
वो
है
जोगन,
पाखंडी
मैं
आँखों
से
फिर
ऐसा
पकड़ा,
उसका
दिल
था
और
बंदी
मैं
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Divya 'Kumar Sahab'
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क्या
ख़ास
है
उस
में
बताओ
पूछता
है
मन
मेरा
दिल
ने
कहा
गर
वो
नहीं
तो
ख़ास
फिर
कुछ
भी
नहीं
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Divya 'Kumar Sahab'
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गर
गले
से
वो
लगा
ले
और
कहे
अपना
मुझे
आँख
से
आँसू
नहीं
फिर
दिल
टपक
जाए
मेरा
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