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Divya 'Kumar Sahab'
ban gaya hai shahar to ab gaav inko chahiye
ban gaya hai shahar to ab gaav inko chahiye | बन गया है शहर तो अब गाँव इनको चाहिए
- Divya 'Kumar Sahab'
बन
गया
है
शहर
तो
अब
गाँव
इनको
चाहिए
काट
देते
हैं
शजर
फिर
छाँव
इनको
चाहिए
आँख
में
इज़्ज़त
नहीं
है
लड़कियों
के
वास्ते
और
पायल
के
लिए
फिर
पाँव
इनको
चाहिए
- Divya 'Kumar Sahab'
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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है
दुख
तो
कह
दो
किसी
पेड़
से
परिंदे
से
अब
आदमी
का
भरोसा
नहीं
है
प्यारे
कोई
Madan Mohan Danish
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जिस
की
हर
शाख़
पे
राधाएँ
मचलती
होंगी
देखना
कृष्ण
उसी
पेड़
के
नीचे
होंगे
Bekal Utsahi
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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मेरे
आँगन
में
एक
बूढ़ा
पेड़
छाँव
भी
देता
है,
दुआएँ
भी
Ankit Maurya
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रुकें
तो
धूप
से
नज़रें
बचाते
रहते
हैं
चलें
तो
कितने
दरख़्त
आते
जाते
रहते
हैं
Charagh Sharma
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एक
गुब्बारे
की
क़ीमत
अब
पता
मुझको
चली
एक
गुम-सुम
है
खड़ा
और
एक
रोता
घर
गया
Divya 'Kumar Sahab'
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मनेगी
इस
तरह
तुम
देखना
दीपावली
अपनी
कहोगे
हाथ
छोड़ो
भी
पकौड़े
जल
रहे
हैं
जी
Divya 'Kumar Sahab'
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आँख
में
आज
ये
ख़्वाब
सारे
लिए
इन
गुलाबों
को
तोड़ा
तुम्हारे
लिए
लफ़्ज़
इज़हार
के
जब
वो
समझे
नहीं
नैन
नम
हो
गए
फिर
नज़ारे
लिए
भेंट
ये
फ़रवरी
की
रखी
रह
गई
माँ
से
मैं
बात
करता
हमारे
लिए
चाँद
उतरा
है
छत
पर
किसी
और
के
मैं
खड़ा
रह
गया
ये
सितारे
लिए
रूठ
जाएगा
जिस
दिन
समुंदर
यहाँ
ढूँढ़ना
तुम
नमी
फिर
किनारे
लिए
प्यार
में
हार
है
तो
मुनाफ़ा
ही
है
तेज़
धड़केगा
दिल
अब
ख़सारे
लिए
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Divya 'Kumar Sahab'
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चले
जो
साथ
ऑटो
में
वो
गाड़ी
में
चलेगी
फिर
कभी
जो
सूट
में
थी
साथ
साड़ी
में
चलेगी
फिर
Divya 'Kumar Sahab'
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दोस्त
कहते
हैं
मुझे
भूलो
उसे
आगे
बढ़ो
पर
कभी
बुझती
नहीं
है
प्यास
पानी
के
बिना
Divya 'Kumar Sahab'
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