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Divya 'Kumar Sahab'
aankhoñ se aañsu chal nikle
aankhoñ se aañsu chal nikle | आँखों से आँसू चल निकले
- Divya 'Kumar Sahab'
आँखों
से
आँसू
चल
निकले
पन्नों
पर
फिर
काजल
बिखरे
सारे
के
सारे
ज्ञानी
थे
बस
हम
ही
थे
पागल
निकले
- Divya 'Kumar Sahab'
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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दिन
तो
ख़ैर
गुज़र
जाता
है
रातें
पागल
कर
देती
हैं
Noon Meem Danish
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इक
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत
का
अदना
ये
फ़साना
है
सिमटे
तो
दिल-ए-आशिक़
फैले
तो
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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अपनी
ज़बाँ
से
कुछ
न
कहेंगे
चुप
ही
रहेंगे
'आशिक़
लोग
तुम
से
तो
इतना
हो
सकता
है
पूछो
हाल
बेचारों
का
Ibn E Insha
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इश्क़
में
पागल
हो
जाना
भी
फ़न
है
दोस्त
और
ये
दुख
की
बात
है
हम
फ़नकार
नहीं
Praveen Sharma SHAJAR
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वो
जो
पागल
था
अब
वो
कैसा
है
ऐसे
वो
पूछता
है
हाल
मेरा
Swapnil Tiwari
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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एक
गुब्बारे
की
क़ीमत
अब
पता
मुझको
चली
एक
गुम-सुम
है
खड़ा
और
एक
रोता
घर
गया
Divya 'Kumar Sahab'
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फ़िक्र
करता
ही
नहीं
अब,
याद
रहता
है
यही
कुछ
भी
अच्छा
या
बुरा
हो,
सोचते
बस
हैं
तुझे
Divya 'Kumar Sahab'
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बस
मोहब्बत
बाँटने
का
ये
असर
हम
पर
हुआ
वो
हमीं
हैं
जो
किसी
के
भी
पसंदीदा
नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
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कहा
दिल
ने
हमें
वो
था
हमारा
तभी
बोला
ये
मन
अच्छा
हमारा
नज़र
आए
नहीं
आँसू
हमारे
समझ
में
आ
गया
ग़ुस्सा
हमारा
उन्होंने
एक
बुक
माँगी
थी
हम
सेे
वो
उनके
हाथ
में
दिल
था
हमारा
जो
उनके
गाल
चू
में
फिर
ये
समझे
है
मीठा
सा
नमक-पारा
हमारा
कोई
उन
सेे
कहो
वो
कॉल
कर
लें
कोई
धीमा
करो
मरना
हमारा
किताबों
को
लिए
बैठा
तो
हूँ
पर
कहीं
जारी
भी
है
उड़ना
हमारा
हमारा
कान
भूखा
रह
गया
है
कोई
बोलो
हमें
अपना
हमारा
हमारे
पास
दिल
तो
है
बड़ा
पर
रखा
है
पास
में
डंडा
हमारा
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Divya 'Kumar Sahab'
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हाँ
रहते
हैं
अब
राहों
में,
तुझ
बिन
तो
हम
बेघर
निकले,
आशा
थी
मरहम
दोगे
तुम,
पर
आखर
सब
ख़ंजर
निकले
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