tere aanchal ko pakad kar raah men chalte rahe | तेरे आँचल को पकड़ कर राह में चलते रहे

  - Divya 'Kumar Sahab'
तेरेआँचलकोपकड़करराहमेंचलतेरहे
होगईथीशामपरहमरातभरढ़लतेरहे
आजतेरीयादनेफिरसेहमेंतड़पादिया
आजफिरहमहाथसेदिलथामकरजलतेरहे
साथलेजानेहमेंफिरमौतयेआईमगर
आसकीइकडोरसेहममौतकोछलतेरहे
साथअपनोकेखड़ेसबहमअकेलेथेखड़े
भीड़मेंढूँढातुझेऔरहाथहममलतेरहे
शब्दकुछऐसेलगेवोज़ख़्मदिलपरहोगए
आँखसेआँसूगिरेऔरज़ख़्मयेफलतेरहे
ख़ौफ़खोनेकातुझेथाख़ौफ़हीसचहोगया
रोककरकेवक़्तकोहमख़ौफ़मेंपलतेरहे
  - Divya 'Kumar Sahab'
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