hai abhii aur ab nahin ye jism bhi kya cheez hai | है अभी और अब नहीं ये जिस्म भी क्या चीज़ है

  - Divya 'Kumar Sahab'
हैअभीऔरअबनहींयेजिस्मभीक्याचीज़है
ख़ाकउड़करकहरहीहैज़िंदगीक्याचीज़है
धूपऔरयेचाँदनीदोनोंबिखरतीहैंमगर
एकचेहरेनेबतायारौशनीक्याचीज़है
जोकियामहसूसअबतकपरकभीउलझनथी
इसमोहब्बतनेदिखायाबेबसीक्याचीज़है
गयायेबोझदिलसेआँखपरजबएकदिन
यादनेसमझायाहमकोयेनमीक्याचीज़है
इकयेदिलकहतारहेसबकुछअधूराहैयहाँ
मुफ़्लिसीभीअबसुनातीहैकमीक्याचीज़है
  - Divya 'Kumar Sahab'
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