dhoondhne ko ik nadi saahil bhatk jaa.e meraa | ढूँढने को इक नदी साहिल भटक जाए मेरा

  - Divya 'Kumar Sahab'
ढूँढनेकोइकनदीसाहिलभटकजाएमेरा
नामहरपलउनलबोंपरबसअटकजाएमेरा
प्रेमसेबादलभराहैपरबरसताहीनहीं
अबज़राआकरज़मींबादलझटकजाएमेरा
प्रेमउसकाबनकेसेहरामेरेसिरपरसजे
उसकामंगलसूत्रबनकरदिललटकजाएमेरा
सिर्फ़येजीवननहींहरजन्मउसकेसाथहो
ज़ेहनमेंउसकेयहीसपनाअटकजाएमेरा
भाग्यनेमुझकोदिएकाँटेवोदिलमेंचुभरहे
भाग्यकेपैरोंतलेआँसूखटकजाएमेरा
  - Divya 'Kumar Sahab'
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