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Krishan Kant Saini
na hai us kii KHvaahish na hi pyaar ab
na hai us kii KHvaahish na hi pyaar ab | न है उस की ख़्वाहिश न ही प्यार अब
- Krishan Kant Saini
न
है
उस
की
ख़्वाहिश
न
ही
प्यार
अब
नहीं
मैं
नहीं
करता
इज़हार
अब
यहाँ
हर
कोई
ख़ुश
नज़र
आता
है
बदल
ही
गई
क्या
वो
सरकार
अब
मिरा
देखना
उस
को
फिर
सोचना
नहीं
है
वो
पहले
सा
क्यूँ
यार
अब
मोहब्बत
ही
तो
बेचा
करता
है
वो
मोहब्बत
भी
है
एक
व्यापार
अब
वफ़ाएँ
सिखाते
थे
मुझ
को
कभी
कहाँ
हैं
वो
सारे
वफ़ादार
अब
मुझे
उस
के
जाने
का
भी
दुख
नहीं
ये
दिल
हो
गया
है
समझदार
अब
- Krishan Kant Saini
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मुझे
हँसते
हुए
देखा
है
तुमने
मैं
अब
ग़ुस्सा
दिखाना
चाहता
हूँ
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रस्सी
वो
देखता
ही
रहा
टकटकी
लगाए
जब
तक
कि
घर
में
बिल्कुल
अँधेरा
नहीं
हुआ
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बस
जनाज़े
पे
तू
ही
मेरे
पास
हो
उस
कफ़न
में
मिरे
बस
तेरी
बास
हो
पास
हैं
तेरे
तो
लाख
मद्दाह
पर
चाहने
वाला
इक
मेरे
भी
पास
हो
मैं
जता
दूँगा
यारो
मोहब्बत
ये
पर
उसके
हाँ
करने
की
कोई
तो
आस
हो
रात
दिन
बस
यही
सोचता
हूँ
मैं
अब
जो
न
हो
साथ
तो
ख़्वाब
में
पास
हो
चाहता
हूँ
मैं
जीना
ख़ुशी
से
मगर
चाहता
हूँ
उदासी
भी
अब
पास
हो
मेरे
रोने
पे
जिसके
निकल
आएँ
अश्क
ज़िंदगी
में
कोई
इतना
भी
ख़ास
हो
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Krishan Kant Saini
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तू
मुझे
कल
ही
मिला
है
पर
बता
देता
हूँ
अब
बिछड़ने
वाले
ख़ुद
को
ही
सज़ा
देते
हैं
Krishan Kant Saini
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एक
दिल
ज़ख़्म
लाखों
ये
क्या
हो
गया
मैं
जिसे
चाहता
था
ख़फ़ा
हो
गया
एक
ज़िद
थी
कि
मैं
छोड़
दूँ
ये
जहाँ
एक
ज़िद
में
ही
ख़ुद
से
जुदा
हो
गया
मैं
जिसे
ख़्वाब
में
मानता
था
मिरा
अस्ल
में
वो
किसी
का
ख़ुदा
हो
गया
सोचता
रहता
हूँ
अपने
बारे
में
अब
क्या
हुआ
करता
था
और
क्या
हो
गया
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Krishan Kant Saini
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