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Kohar
kyun nahin
kyun nahin | क्यूँँं नहीं
- Kohar
क्यूँँं
नहीं
मैं
ग़म
से
पूछता
तेरा
ख़ुशी
से
वास्ता
क्यूँँं
नहीं
मोहब्बत
भी
है
दोनों
का
एक
रास्ता
क्यूँँं
नहीं
जुदा
हो
कर
भी
वो
मुझ
सेे
ख़ुश
क्यूँँं
ना
रहा
वो
मुझे
दूर
कर
भी
ख़ुद
से
क़रीब
क्यूँँं
ना
रहा
उलझा
रहता
था
मेरी
वजह
से
अब
मैं
नहीं
तो
वो
सुलझा
क्यूँँं
नहीं
- Kohar
जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं
ज़िन्दगी
में
आज
पहली
बार
घर
नहीं
गया
मगर
तमाम
रात
दिल
से
माँ
का
डर
नहीं
गया
बस
एक
दुख
जो
मेरे
दिल
से
उम्र
भर
न
जाएगा
उसको
किसी
के
साथ
देख
कर
मैं
मर
नहीं
गया
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Tehzeeb Hafi
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इस
बात
पर
तू
हाथ
मिला
अब
तेरी
तरह
ग़म
का
लिबास
ओढ़
के
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
shaan manral
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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यहाँ
वो
कौन
है
जो
इंतिख़ाब-ए-ग़म
पे
क़ादिर
हो
जो
मिल
जाए
वही
ग़म
दोस्तों
का
मुद्दआ'
होगा
Jaun Elia
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गुम-शुदा
कह
कर
मुझे
जब
तक
तलाशा
ख़ुद
में
गुम
मैं
काफी
अंदर
तक
गया
था
Kohar
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उस
को
मुझ
सेे
दूरी
पर
रख
कर
अब
मैं
तन्हा
अपनी
रातें
करता
हूँ
Kohar
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इस
क़दर
इश्क़
के
मायने
बदले
चेहरा
इक
रहा,
आइने
बदले
Kohar
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जब
से
गया
है
छोड़
कर
ग़म
से
रहा
हूँ
तर
बतर
Kohar
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मैं
पहले
भी
तो
तुम
से
ये
कह
चुका
हूँ
मुश्किल
से
शब-ए-हिज्र
को
सह
चुका
हूँ
कभी
नींव
पक्की
मोहब्बत
की
थी
जिसकी
वही
मैं
किला
हूँ
जो
अब
ढ़ह
चुका
हूँ
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Kohar
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