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Khalid Azad
ham apni aankh se manzar naya talashe'nge
ham apni aankh se manzar naya talashe'nge | हम अपनी आँख से मंज़र नया तलाशेंगे
- Khalid Azad
हम
अपनी
आँख
से
मंज़र
नया
तलाशेंगे
उजड़
जो
जाए
तो
फिर
घर
नया
तलाशेंगे
ज़रा
सी
चोट
से
सब
कुछ
समझ
में
आ
जाए
तो
अब
की
राह
में
पत्थर
नया
तलाशेंगे
- Khalid Azad
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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काश
ऐसा
कोई
मंज़र
होता
मेरे
काँधे
पे
तेरा
सर
होता
Tahir Faraz
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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थोड़ा
सा
अक्स
चाँद
के
पैकर
में
डाल
दे
तू
आ
के
जान
रात
के
मंज़र
में
डाल
दे
Kaif Bhopali
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महफिल
में
भी
तन्हाई
ने
घेरा
है
यानी
अंदर
से
मैं
कितना
ख़ाली
हूँ
Khalid Azad
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ज़िंदगी
से
गर
हमें
थोड़ी
बहुत
मोहलत
मिली
बैठ
कर
है
सोचना
किस
बात
की
उजरत
मिली
Khalid Azad
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हमें
दरकार
है
फिर
इक
सफ़र
की
ज़रा
सा
काम
बाक़ी
रह
गया
है
Khalid Azad
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इस
बार
मुझे
क़ैद
से
आज़ाद
करेगा
इक
दिन
ये
अलग
काम
भी
सय्याद
करेगा
ये
सोच
के
ही
हमने
मुहब्बत
को
चुना
था
इक
रोज़
हमें
इश्क़
ये
बर्बाद
करेगा
इस
बार
बिछड़ने
में
बहुत
देर
लगा
दी
इस
बार
नया
ढ़ंग
वो
ईजाद
करेगा
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Khalid Azad
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अपने
ही
किसी
ग़म
का
मुदावा
नहीं
होता
वरना
तेरी
दुनिया
में
तो
क्या
क्या
नहीं
होता
Khalid Azad
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