phool bikhra to na ye soch kidhar jaayega | फूल बिखरा तो न ये सोच किधर जाएगा

  - KARAN
फूलबिखरातोयेसोचकिधरजाएगा
बनकेख़ुशबू-साफ़िज़ाओंमेंबिखरजाएगा
वक़्तहरज़ख़्मकामरहमनहींहोतापागल
रहते-रहतेयूँँजुदारब्तभीमरजाएगा
जानलेलेगायक़ीननग़म-ए-जानाँमेरी
कुछघड़ीऔरअगरदिलमेंठहरजाएगा
हम-सफ़रबादतेरेकुछनहींबदलेगामगर
हाँतेरेसाथमेराशौक़-ए-सफ़रजाएगा
जा-ब-जासरझुकाहोशमेंबातसमझ
बे-तरहदोस्तदु'आओंसेअसरजाएगा
ग़ैर-मुमकिनहैतेरेबादकहींदिललगे
सोचलेजानेसेपहलेतूअगरजाएगा
इकमुसाफ़िरसेनहींठीकलगानादिलका
जानेकिसराहमुसाफ़िरयेगुज़रजाएगा
इसमुहब्बतनेमुझेदीहैंख़राशेंइतनी
आईनादेखकेसूरतमेरीडरजाएगा
ढूँढनेलगतेहैंदीवार-ओ-दर-ओ-बामतुझे
करनशामढलेआजतोघरजाएगा
  - KARAN
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