dil-e-khoon ko koii tasalli nahin hai | दिल-ए-खूँ को कोई तसल्ली नहीं है

  - Kanha Mohit
दिल-ए-खूँकोकोईतसल्लीनहींहै
दवाभीकोईकामआतीनहींहै
समझतानहींकोईरू-पोशकाग़म
उदासीकीचादरउतरतीनहींहै
तेरेसाथघूमातोअच्छीलगीथी
बिनातेरेपहलेसीदिल्लीनहींहै
ख़मोशीउदासीख़ुमारीफ़क़ीरी
जवानीकेजैसीजवानीनहींहै
तुम्हेंहीगलेसेलगानीपड़ेगी
गलेख़ुदहीरस्सीलगातीनहींहै
गुज़रतीहुमासिरकेऊपरसेलेकिन
शिकारीकीफ़ितरतबदलतीनहींहै
वोदीवारतस्वीरकमराहमारा
पुकारेंउसेपरवोआतीनहींहै
गुलोंकीअनादेखकरआजसमझा
अनाआपकीफिरतोकुछभीनहींहै
वोआएगीघरपरपड़ोसीकहेंगे
हमेंगोरकीजानकारीनहींहै
मुसव्विरतोमोहितभीअच्छाथालेकिन
तसव्वुरमेंतस्वीरउतरतीनहींहै
  - Kanha Mohit
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