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Kaffir
ye tira shahar mujhse kabhi chhoota hi nahin hai
ye tira shahar mujhse kabhi chhoota hi nahin hai | ये तिरा शहर मुझ सेे कभी छूटता ही नहीं है
- Kaffir
ये
तिरा
शहर
मुझ
सेे
कभी
छूटता
ही
नहीं
है
यार
ज़ालिम
मिरा
हाल
तो
पूछता
भी
नहीं
है
ख़्वाब
ख़्वाहिश
दु'आ
सब
में
शामिल
है
ये
शहर
उसका
भूल
जाऊँ
मैं
पर
ये
मुझे
भूलता
ही
नहीं
है
- Kaffir
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कम
ही
लोग
हैं
जिनको
मैं
भी
ख़ास
लगता
हूँ
जब
उदास
होता
हूँ
तब
उदास
लगता
हूँ
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प्यासे
का
मान
क्या
है
दुनिया
से
काम
क्या
है
ये
प्यास
ही
न
हो
गर
क्या
दरिया
जाम
क्या
है
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तू
ठहरे
तो
चाहूँ
कि
चलता
वक़्त
थम
जाए
मेरा
फिर
गोद
में
सोऊँ
तेरी
तो
ख़ून
जम
जाए
मेरा
ये
मौत
जब
भी
आए
तो
बाँहें
मिले
तेरी
मुझे
मुझको
गले
से
तू
लगाए
और
दम
जाए
मेरा
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है
आख़िरी
ये
इश्क़
है
हद
साँस
आख़िरी
हो
मौत
तेरी
बाँहों
में
जन्नत
भी
लाज़मी
ऐसी
मिसाल
दूँ
ख़ुदा
को
नाम
तेरा
दूँ
तू
शा'इरी
है
तुझ
सेे
मेरा
इश्क़
काफ़िरी
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रोज़
शाम
हम
बैठे
उसके
ख़्वाब
में
डूबे
फिर
उसे
भुलाना
था
तो
शराब
में
डूबे
क्या
सवाल
पूछा
था
क्या
ही
फ़र्क़
पड़ता
है
हम
तो
सिर्फ़
'काफ़िर'
अब
इक
जवाब
में
डूबे
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