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Kaffir
ye safar ka ant meraa main mohabbat kar chuka hooñ
ye safar ka ant meraa main mohabbat kar chuka hooñ | ये सफ़र का अंत मेरा मैं मोहब्बत कर चुका हूँ
- Kaffir
ये
सफ़र
का
अंत
मेरा
मैं
मोहब्बत
कर
चुका
हूँ
अब
ख़ुदा
का
ख़ौफ़
नइँ
मैं
तो
बग़ावत
कर
चुका
हूँ
जिस्म
की
अब
भूख
नइँ
नइँ
रूह
की
कोई
ज़रूरत
आख़िरी
लम्हों
के
ख़्वाबों
को
हक़ीक़त
कर
चुका
हूँ
- Kaffir
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ग़ुस्सा
भी
करे
लेकिन
वो
कमाल
लगती
है
काला
जब
पहनती
है
वो
बवाल
लगती
है
मेरा
दिन
उसी
का
है
मेरी
रात
भी
उसकी
ख़ूबसूरती
की
ख़ुद
वो
मिसाल
लगती
है
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तू
ठहरे
तो
चाहूँ
कि
चलता
वक़्त
थम
जाए
मेरा
फिर
गोद
में
सोऊँ
तेरी
तो
ख़ून
जम
जाए
मेरा
ये
मौत
जब
भी
आए
तो
बाँहें
मिले
तेरी
मुझे
मुझको
गले
से
तू
लगाए
और
दम
जाए
मेरा
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वैसे
समुंदर
हूँ
मगर
ख़ुद
को
मैं
क़तरा
भी
मेरा
हासिल
नहीं
वो
भी
मेरा
होकर
ज़रा
सा
मेरे
हिस्से
में
कभी
शामिल
नहीं
मैं
गर
कहूँ
ये
रात
बाक़ी
है
ज़रा
सा
ठहर
मेरी
पलकों
पर
काफ़िर
वो
तो
कहता
है
मेरी
ये
नज़र
अब
चाँद
के
क़ाबिल
नहीं
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डूब
कर
तेरी
आँखों
में
मैंने
जहाँ
देखा
है
तुझ
सेे
ज़्यादा
हसीं
भी
किसी
ने
कहाँ
देखा
है
मैं
बताऊँ
उन्हें
जो
बताते
ख़ुदा
है
नहीं
होता
है
मैंने
देखा
है
काफ़िर
यहाँ
देखा
है
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कम
ही
लोग
हैं
जिनको
मैं
भी
ख़ास
लगता
हूँ
जब
उदास
होता
हूँ
तब
उदास
लगता
हूँ
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