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Meem Alif Shaz
yah tahzeeb bhi dekhi hai ham ne tum ne
yah tahzeeb bhi dekhi hai ham ne tum ne | यह तहज़ीब भी देखी है हम ने तुम ने
- Meem Alif Shaz
यह
तहज़ीब
भी
देखी
है
हम
ने
तुम
ने
नाम
अनिल
है
लेकिन
उर्दू
लिखता
है
- Meem Alif Shaz
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ज़रा
नज़दीक
आकर
सुन
मेरी
इक
बात
ऐ
उर्दू
मेरी
तहरीर
बिन
तेरे
मुकम्मल
हो
नहीं
सकती
Avtar Singh Jasser
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गले
मिली
कभी
उर्दू
जहाँ
पे
हिन्दी
से
मिरे
मिज़ाज
में
उस
अंजुमन
की
ख़ुशबू
है
Satish Shukla Raqeeb
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कोई
वा'दा
न
देंगे
दान
में
क्या
झूट
तक
अब
नहीं
ज़बान
में
क्या
Tufail chaturvedi
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आज
भी
'प्रेम'
के
और
'कृष्ण'
के
अफ़्साने
हैं
आज
भी
वक़्त
की
जम्हूरी
ज़बाँ
है
उर्दू
Ata Abidi
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हम
हैं
हिन्दी
और
हमारा
मुल्क
है
हिन्दोस्ताँ
हिन्द
में
पैदा
तसव्वुफ़
के
ज़बाँ-दाँ
कीजिए
Sahir Dehlavi
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नादानी
ये
ज़रा
सी
ले
ले
न
जान
मेरी
फूलों
से
भर
रखी
है
मैंने
मयान
मेरी
हैं
आपको
जो
शिकवे
मेरी
ज़बान
से
जाँ
तो
काट
लें
लबों
से
अपने
ज़बान
मेरी
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vivek sahu
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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सब
इंतज़ार
में
थे
कब
कोई
ज़बान
खुले
फिर
उसके
होंठ
खुले
और
सबके
कान
खुले
Umair Najmi
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रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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तारीकियों
को
आग
लगे
और
दिया
जले
ये
रात
बैन
करती
रहे
और
दिया
जले
उस
की
ज़बाँ
में
इतना
असर
है
कि
निस्फ़
शब
वो
रौशनी
की
बात
करे
और
दिया
जले
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Tehzeeb Hafi
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तेरा
यह
कंगन
धक
धक
करता
है
शायद
यह
मेरे
दिल
में
रहता
था
Meem Alif Shaz
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शराबी
थी
उन
की
वो
आँखें
तभी
मुझ
पे
उन
का
असर
था
Meem Alif Shaz
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इतनी
भीड़
तो
सब
को
डराती
होगी
शहरों
में
जब
सन्नाटा
हम
को
चैन
नहीं
लेने
देता
Meem Alif Shaz
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परिंदों
से
था
इक
रिश्ता
हमारा
दरख़्तों
को
जलाकर
सच
छुपाया
Meem Alif Shaz
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तुम
चलते
चलते
क्यूँ
रुक
जाते
हो
अपने
ग़म
को
बाहर
क्यूँ
लाते
हो
जब
उम्मीद
नहीं
उस
के
आने
की
हर
वादे
से
ठोकर
क्यूँ
खाते
हो
जब
दुनिया
सुनती
ही
नहीं
ख़ामोशी
तुम
इतनी
ख़ामोशी
क्यूँ
गाते
हो
शीशे
से
बातें
करते
हो
लेकिन
मेरे
लिए
पत्थर
क्यूँ
बन
जाते
हो
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Meem Alif Shaz
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