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Meem Alif Shaz
yah baat sach hai ab mohabbat ka zamaana hi nahin
yah baat sach hai ab mohabbat ka zamaana hi nahin | यह बात सच है अब मोहब्बत का ज़माना ही नहीं
- Meem Alif Shaz
यह
बात
सच
है
अब
मोहब्बत
का
ज़माना
ही
नहीं
पहले
जो
हम
सुनते
थे
अब
तो
वो
फ़साना
ही
नहीं
चाँदी
के
बर्तन
और
सोने
के
तो
कंगन
हैं
मगर
माँ
बाप
के
जाने
से
घर
में
अब
ख़ज़ाना
ही
नहीं
- Meem Alif Shaz
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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जनाज़े
पर
मेरे
लिख
देना
यारों
मोहब्बत
करने
वाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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प्यार-मोहब्बत
सीधे-सादे
रस्ते
हैं
कोई
इन
पर
चलने
को
तैयार
नहीं
Ashok Rawat
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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उस
के
लफ़्ज़ों
में
नाख़ून
छुपे
थे
ज़ख़्म
तभी
तो
इतना
गहरा
हुआ
है
Meem Alif Shaz
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तेरी
यादों
में
इतना
खो
जाता
हूँ
ख़त
लिखते
लिखते
शायर
हो
जाता
हूँ
Meem Alif Shaz
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ग़ज़लों
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
रहा
था
एक
दिन
सारे
सामईन
बोले
लड़की
ख़ुशनसीब
है
Meem Alif Shaz
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जो
दरख़्तों
को
भी
खा
जाए
जड़ों
से
उस
बशर
के
सामने
शैतान
भी
क्या
Meem Alif Shaz
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वो
मुझ
को
भी
बुलाता
तो
है
अपने
घर
उल्फ़त
से
लेकिन
मेरे
आने
से
पहले
ही
चला
जाता
है
Meem Alif Shaz
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