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Meem Alif Shaz
raaz raaz hota hai kaafi khaas hota hai
raaz raaz hota hai kaafi khaas hota hai | राज़ राज़ होता है काफ़ी ख़ास होता है
- Meem Alif Shaz
राज़
राज़
होता
है
काफ़ी
ख़ास
होता
है
एक
राज़
यह
भी
है
मुझ
को
भी
मोहब्बत
थी
- Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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तसव्वुर
में
भी
अब
वो
बे-नक़ाब
आते
नहीं
मुझ
तक
क़यामत
आ
चुकी
है
लोग
कहते
हैं
शबाब
आया
Hafeez Jalandhari
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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तू
ने
ये
क्या
ग़ज़ब
किया
मुझ
को
भी
फ़ाश
कर
दिया
मैं
ही
तो
एक
राज़
था
सीना-ए-काएनात
में
Allama Iqbal
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हम
तो
उस
आँख
के
हैं
देखने
वाले,
देखो
जिस
में
शोख़ी
है
बहुत
और
हया
थोड़ी
सी
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Dagh Dehlvi
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उसकी
बातें
बहुत
दर्द
देती
हैं
शाज़
जिस
की
बातें
कभी
दर्द
देती
नहीं
Meem Alif Shaz
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हमारा
नाम
भी
बदनाम
होगा
मोहब्बत
पूछ
कर
की
जो
नहीं
थी
Meem Alif Shaz
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मेरे
जिस्म
से
भी
रूह
को
हटा
दिया
गया
ख़ाक
में
मुझे
भी
एक
दिन
मिला
दिया
गया
लोगों
के
हसद
की
आग
से
हुआ
ये
हादसा
मेरे
ख़्वाब
को
बुरी
तरह
जला
दिया
गया
में
चला
था
ख़ुद
अँधेरों
को
मिटाने
इसलिए
मेरे
हौसले
के
दीप
को
बुझा
दिया
गया
हम
किसे
बताते
सरहदों
पे
जश्न
क्यूँ
हुआ
मेरे
सामने
मकान
को
जला
दिया
गया
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Meem Alif Shaz
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जब
हम
ने
अपने
ग़म
को
भुलाया
उस
के
बाद
सब
ने
बातों
का
तीर
चलाया
उस
के
बाद
पहले
तो
ज़िद
की
थोड़ी
सी
रिश्वत
लेलो
जब
लेली
तो
लोगों
को
बताया
उस
के
बाद
हम
ग़ैरों
से
लाए
थे
कुछ
सच्चे
रिश्ते
अपनो
ने
तो
उन
को
भी
सताया
उस
के
बाद
हम
तो
बस
ख़ुशबू
देने
गए
थे
उन
के
घर
फिर
भी
हम
को
दुश्मन
ही
बताया
उस
के
बाद
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Meem Alif Shaz
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जो
हमारे
वफ़ादार
हैं
वो
सभी
थोड़े
से
पैसों
के
भी
तलबगार
हैं
Meem Alif Shaz
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