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Meem Alif Shaz
logon ka kya hai vo kah denge achha
logon ka kya hai vo kah denge achha | लोगों का क्या है वो कह देंगे "अच्छा"
- Meem Alif Shaz
लोगों
का
क्या
है
वो
कह
देंगे
"अच्छा"
दिल
तो
हमारा
टूटा
है
हम
ही
जाने
- Meem Alif Shaz
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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ये
कब
कहा
था
मुझे
हमनवा
नहीं
देना
मगर
हाँ
फिर
से
वही
बे-वफ़ा
नहीं
देना
मैं
टूट
जाऊँ
तो
आकर
गले
लगा
लेना
कोई
दलील
कोई
मशवरा
नहीं
देना
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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उस
मेहरबाँ
नज़र
की
इनायत
का
शुक्रिया
तोहफ़ा
दिया
है
ईद
पे
हम
को
जुदाई
का
Unknown
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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यूँँ
तो
वो
इत्रदान
था
लेकिन
ये
क्या
हुआ
टूटा
तो
एक
सम्त
भी
ख़ुशबू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
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किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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दिल
अभी
पूरी
तरह
टूटा
नहीं
दोस्तों
की
मेहरबानी
चाहिए
Abdul Hamid Adam
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ईद
का
दिन
तो
है
मगर
'जाफ़र'
मैं
अकेले
तो
हँस
नहीं
सकता
Jaafar Sahni
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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अपनी
आँखों
से
किसी
दिन
यह
तमाशा
देखना
दर्द
में
रोते
हुए
ख़ुद
को
ही
तन्हा
देखना
पहले
तुम
सीखो
ज़रा
तैराकी
का
हर
इक
हुनर
साथ
चलते
चलते
फिर
हर
एक
दरिया
देखना
"शाज़"
घर
से
दूर
तो
बस
अजनबी
ही
मिलते
हैं
जब
कभी
घर
जाओ
तो
कोई
शनासा
देखना
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Meem Alif Shaz
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एक
ताज़ा
गुलाब
है
मेरे
पास
फिर
भी
ख़ुशबू
तेरी
ही
आती
है
Meem Alif Shaz
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टूटे
हुए
घर
में
मकाँ
सा
कुछ
नहीं
मग़रूर
होने
का
निशाँ
सा
कुछ
नहीं
मिल
सकती
है
तस्वीर
मेरी
भी
मगर
तस्वीर
में
मेरी
बयाँ
सा
कुछ
नहीं
हम
क्यूँ
मिले
क्यूँ
दोस्ती
उस
से
करें
जिस
की
ज़बाँ
पे
भी
अज़ाँ
सा
कुछ
नहीं
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Meem Alif Shaz
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तू
तो
अपनी
शातिर
आँखों
का
मुजरिम
है
प्यारे
फिर
बिन्त-ए-हव्वा
पर
क्यूँ
इल्ज़ाम
लगाया
जाए
Meem Alif Shaz
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हम
को
कोई
सराब
मत
देना
झूठा
कोई
भी
ख़्वाब
मत
देना
रोज़
बस
होटों
की
हँसी
दे
दो
साल
में
इक
गुलाब
मत
देना
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Meem Alif Shaz
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