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Meem Alif Shaz
hijr ke mausam men itni sardiyaan achchhii nahin
hijr ke mausam men itni sardiyaan achchhii nahin | हिज्र के मौसम में इतनी सर्दियाँ अच्छी नहीं
- Meem Alif Shaz
हिज्र
के
मौसम
में
इतनी
सर्दियाँ
अच्छी
नहीं
इश्क़
वालों
के
लिए
तन्हाइयाँ
अच्छी
नहीं
इश्क़
में
लड़ना
झगड़ना
चलता
रहता
है
मगर
बस
ज़रा
सी
बात
पे
ख़ामोशियाँ
अच्छी
नहीं
- Meem Alif Shaz
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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हम
क्या
जानें
जन्नत
कैसी
होती
है
उस
सेे
पूछो
जिसने
तुमको
पाया
है
Harsh saxena
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करती
है
तो
करने
दे
हवाओं
को
शरारत
मौसम
का
तकाज़ा
है
कि
बालों
को
खुला
छोड़
Abrar Kashif
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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पत्थरों
से
कोई
शिकवा
ही
नहीं
है
मेरे
दोस्त
बात
यह
है
तूने
फेंके
थे
हमारी
ही
तरफ़
Meem Alif Shaz
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ऐ
ख़ुदा
इतना
बे-हिसाब
न
दे
मुझ
को
पैसों
का
यह
अज़ाब
न
दे
Meem Alif Shaz
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तुम
अपनी
आँखें
खोले
रखना
मौत
कहीं
से
भी
आ
सकती
है
Meem Alif Shaz
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अपनी
आँखों
से
बिछा
रख्खा
है
तुम
ने
ऐसा
जाल
तुम
जिसे
भी
देखती
हो
वो
तो
फँस
ही
जाता
है
Meem Alif Shaz
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क्या
मिलेगा
मुझे
इस
दिल
को
तुम्हारा
कर
के
तुम
तो
ख़ुश
हो
कई
लड़कों
का
ख़सारा
कर
के
बरकतें
रुक
नहीं
पाती
हैं
घरों
के
अंदर
हम
ने
देखा
है
गरीबों
को
किनारा
कर
के
मख़मली
रस्ता
बनाना
है
उन्हीं
की
ख़ातिर
थक
गए
जो
मुझे
मिट्टी
से
सितारा
कर
के
ये
ज़माना
नया
है
शाज़
यहाँ
हर
कोई
बस
चला
जाता
है
घाइल
का
नज़ारा
कर
के
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Meem Alif Shaz
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