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Meem Alif Shaz
aaj phir roya hai shajar koi
aaj phir roya hai shajar koi | आज फिर रोया है शजर कोई
- Meem Alif Shaz
आज
फिर
रोया
है
शजर
कोई
आज
फिर
तूने
टहनियाँ
तोड़ी
- Meem Alif Shaz
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है
नार
दोस्तों
कसरत
से
मुंतज़िर
उनकी
ग़म-ए-हुसैन
में
जो
कारोबार
करते
हैं
ये
सब
हैं
गुलशन-ए-हैदर
के
गुल
शजर
ज़ैदी
ये
गुल
तब्बसुम-ए-लब
से
शिकार
करते
हैं
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Shajar Abbas
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
Tehzeeb Hafi
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परिंदे
लड़
ही
पड़े
जाएदाद
पर
आख़िर
शजर
पे
लिक्खा
हुआ
है
शजर
बराए-फ़रोख़्त
Afzal Khan
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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घर
चलाने
के
लिए
क्या
बन
गया
सोने
से
मैं
कोई
काँसा
बन
गया
दोस्ती
में
इश्क़
भी
होने
लगा
रस्ते
में
इक
और
रस्ता
बन
गया
ग़म
ने
इतनी
बार
तोड़ा
है
मुझे
मुझ
को
लगता
है
मैं
धागा
बन
गया
हुस्न
पे
इतराता
था
दरिया
बहुत
इस
क़दर
सूखा
कि
गड्ढा
बन
गया
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Meem Alif Shaz
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तन्हाई
कितनी
अच्छी
है
मुझ
से
भी
मिलती
रहती
है
Meem Alif Shaz
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आना
जाना
तो
हर
मौसम
की
फ़ितरत
है
हम
को
तो
अच्छा
लगता
है
बर्फ़
का
गिरना
Meem Alif Shaz
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इस
बार
बदगुमानी
के
ख़ंजर
से
कट
गया
वो
तन्हा
रह
गया
है
जो
लशकर
से
कट
गया
Meem Alif Shaz
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तन्हाई
को
देखो
कितनी
गहरी
है
तुम
जब
मुझ
को
छोड़ोगी
तो
डूबोगी
Meem Alif Shaz
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