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Meem Alif Shaz
tujhe apni tabaahi ka gumaan kyuuñ hai
tujhe apni tabaahi ka gumaan kyuuñ hai | तुझे अपनी तबाही का गुमाँ क्यूँ है
- Meem Alif Shaz
तुझे
अपनी
तबाही
का
गुमाँ
क्यूँ
है
तू
अच्छा
है
तो
तुझ
में
यह
धुआँ
क्यूँ
है
बुराई
तो
बहुत
करता
है
भाई
की
अगर
वो
ज़ख़्मी
है
तो
तू
यहाँ
क्यूँ
है
अगर
तेरे
लबों
से
फूल
गिरते
हैं
तो
मेहमानों
से
ख़ाली
यह
मकाँ
क्यूँ
है
तुझे
अब
सोचना
है
अपनी
ही
ख़ातिर
कि
तेरे
ही
मुक़ाबिल
यह
जहाँ
क्यूँ
है
- Meem Alif Shaz
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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फूल
खिले
हैं
लिखा
हुआ
है
तोड़ो
मत
और
मचल
कर
जी
कहता
है
छोड़ो
मत
Ameeq Hanafi
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फूल
कर
ले
निबाह
काँटों
से
आदमी
ही
न
आदमी
से
मिले
Khumar Barabankvi
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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तितली
से
दोस्ती
न
गुलाबों
का
शौक़
है
मेरी
तरह
उसे
भी
किताबों
का
शौक़
है
Charagh Sharma
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अपने
होंटों
से
कहो
फूल
को
चू
में
हर
रोज़
जब
मेरे
लब
नहीं
होंगे
तो
सहूलत
होगी
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Shahbaz Rizvi
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ग़ज़लों
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
रहा
था
एक
दिन
सारे
सामईन
बोले
लड़की
ख़ुशनसीब
है
Meem Alif Shaz
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अपनी
इक
शाम
भी
दे
गया
है
मुझे
ज़ख़्मों
का
बाम
भी
दे
गया
है
मुझे
मैंने
तो
अपनी
पहचान
ही
माँगी
थी
अपना
वो
नाम
भी
दे
गया
है
मुझे
इस
नए
दौर
में
हक़
दिला
के
मिरा
यादों
का
जाम
भी
दे
गया
है
मुझे
उर्दू
का
ख़ूब-सूरत
दिखा
के
बदन
इश्क़
का
काम
भी
दे
गया
है
मुझे
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Meem Alif Shaz
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हमारा
दिल
बहकना
चाहता
है
मगर
इस
इश्क़
में
मरना
नहीं
है
Meem Alif Shaz
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इस
मोहब्बत
का
भी
कोई
नाम
है
क्या
जाम
जैसा
इस
का
कोई
काम
है
क्या
बाप
से
हर
पल
शिकायत
ज़िन्दगी
में
ज़िन्दगी
में
बाप
को
आराम
है
क्या
जो
मिरे
कानों
के
दुखना
को
शिफ़ा
दे
कोई
अच्छी
बात
का
भी
बाम
है
क्या
तेरी
खट्टी
बातों
से
मन
भर
गया
है
तेरी
अलमारी
में
मीठा
आम
है
क्या
जो
भी
तू
बोले
सदाक़त
है
यक़ीनन
आज
के
इस
दौर
का
तू
राम
है
क्या
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Meem Alif Shaz
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तेरी
महफ़िल
में
बहुत
ही
शोर
है
शाज़
इश्क़
में
हारे
हुए
सब
आ
गए
क्या
Meem Alif Shaz
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