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Meem Alif Shaz
khol aankhe zara dekh to le
khol aankhe zara dekh to le | खोल आँखें ज़रा देख तो ले
- Meem Alif Shaz
खोल
आँखें
ज़रा
देख
तो
ले
बुझ
गया
है
दिया
देख
तो
ले
क्यूँ
अकड़
के
तू
भी
चल
रहा
है
दूसरा
गिर
गया
देख
तो
ले
हिज्र
कब
तक
मनाएगी
ज़ालिम
मर
गया
है
पिया
देख
तो
ले
ले
लिए
आग
के
फ़ोटो
तूने
जिस्म
किस
का
जला
देख
तो
ले
दाढ़ी
तो
बन
गई
तेरी
लेकिन
बदज़ुबाँ
हो
गया
देख
तो
ले
बाप
ने
पैसे
माँगे
तो
ग़ुस्सा
तुझ
को
क्या
क्या
दिया
देख
तो
ले
- Meem Alif Shaz
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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अब
दुआएँ
पा
रहा
है
हर
दिल-ए-नाशाद
की
क्या
ग़ज़ब
होगा
वो
जिसने
ख़ुद-कुशी
ईजाद
की
शा'इरी
का
ये
हुनर
कुछ
देर
से
आया
मगर
जी-हुज़ूरी
की
नहीं
मैंने
किसी
उस्ताद
की
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Rituraj kumar
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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होश
वालों
को
ख़बर
क्या
बे-ख़ुदी
क्या
चीज़
है
इश्क़
कीजे
फिर
समझिए
ज़िंदगी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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बे-ख़ुदी
में
ले
लिया
बोसा
ख़ता
कीजे
मुआ'फ़
ये
दिल-ए-बेताब
की
सारी
ख़ता
थी
मैं
न
था
Bahadur Shah Zafar
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हम
कोई
ऊँची
चट्टान
नहीं
हैं
लेकिन
तूफानों
से
लड़ने
की
हिम्मत
रखते
हैं
Meem Alif Shaz
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मैं
तेरे
ज़ख़्मों
पे
मरहम
ख़ुद
ही
लगा
तो
देता
लेकिन
अपने
ज़ख़्मों
पे
ही
सारा
मरहम
ख़त्म
हुआ
था
उस
दिन
Meem Alif Shaz
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वो
चाहते
हैं
नग़्मगी
बिल्कुल
अलग
करते
नहीं
जो
शा'इरी
बिल्कुल
अलग
महताब
तो
उन
को
मुयस्सर
होता
है
होती
है
जिन
की
तिश्नगी
बिल्कुल
अलग
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Meem Alif Shaz
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दिल
न
लगे
तो
हम
क्या
कर
सकते
हैं
तेरे
बिना
तो
हम
बस
मर
सकते
हैं
Meem Alif Shaz
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मौत
से
राब्ता
ज़रूरी
है
हम
बुरे
को
बुरा
नहीं
कहते
Meem Alif Shaz
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