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Jatin shukla
badan men thartharaahat rooh kaanpe
badan men thartharaahat rooh kaanpe | बदन में थरथराहट रूह काँपे
- Jatin shukla
बदन
में
थरथराहट
रूह
काँपे
किसी
को
चूमना
आसान
है
क्या
- Jatin shukla
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जिस्म
चादर
सा
बिछ
गया
होगा
रूह
सिलवट
हटा
रही
होगी
Kumar Vishwas
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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बात
ही
कब
किसी
की
मानी
है
अपनी
हठ
पूरी
कर
के
छोड़ोगी
ये
कलाई
ये
जिस्म
और
ये
कमर
तुम
सुराही
ज़रूर
तोड़ोगी
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Jaun Elia
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पिघल
रहा
है
दुपहरी
में
यूँँ
वो
मोम
बदन
कहाँ
कहाँ
से
न
गुजरेगा
पसीना
हाए
Vishnu virat
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उस
साँवले
से
जिस्म
को
देखा
ही
था
कि
बस
घुलने
लगे
ज़बाँ
पे
मज़े
चाकलेट
के
Shahid Kabir
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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मैं
जानता
हूँ
तेरी
रूह
की
तलब
जानाँ
तुझे
बदन
की
तरफ़
से
नहीं
छूउँगा
मैं
Subhan Asad
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बहुत
ग़ुस्से
भरा
लहजा
तुम्हारा
मगर
मीठा
लगा
बोसा
तुम्हारा
गुलाबी
गाल,
बिंदी,
और
काजल
चमकता
चाँद
सा
मुखड़ा
तुम्हारा
बड़ी
हलचल
मची
बारातियों
में
अचानक
देख
कर
ठुमका
तुम्हारा
हमारी
शेरवानी
जँच
रही
तो
क़यामत
ढा
रहा
लहँगा
तुम्हारा
किसी
के
पास
तो
महफ़ूज़
होगा
बरेली
में
गिरा
झुमका
तुम्हारा
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Jatin shukla
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तुम्हारा
इश्क़
साहब
काग़ज़ी
है
तभी
हर
बात
पे
नाराज़गी
है
भला
मेहबूब
किसका
रूठता
है
अगर
रूठा
तो
समझो
दिल-लगी
है
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Jatin shukla
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पूर्ण
अधिकार
जिस
पर
हमारा
रहा
एक
मुखड़ा
जो
आँखों
का
तारा
रहा
एक
लड़का
बदन
जिसका
ब्याहा
गया
एक
लड़का
जो
मन
से
कुँवारा
रहा
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Jatin shukla
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दो
झुके
नयनों
ने
जो
दिनभर
किया
संवाद
लेकर
मैं
अयोध्या
लौट
आया
लखनऊ
से
याद
लेकर
तीन
झुमका
चार
बोसा
पाँच
झप्पी
आठ
कंगन
रख
दिया
है
पर्स
में
पूरा
अमीनाबाद
लेकर
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गुलशन
से
ही
दूर
करोगे
फूलों
को
यानी
चकनाचूर
करोगे
फूलों
को
तितली
से
बिछड़ेंगे
तो
मर
जाएँगे
क्यूँ
इतना
मज़बूर
करोगे
फूलों
को
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