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jaani Aggarwal taak
mire maasoom dil ko tod kar ke
mire maasoom dil ko tod kar ke | मिरे मासूम दिल को तोड़ कर के
- jaani Aggarwal taak
मिरे
मासूम
दिल
को
तोड़
कर
के
चला
जायगा
मुझ
को
छोड़
कर
के
बिखर
जाता
हरिक
टुकड़ा
मुसलसल
हज़ारों
बार
देखा
जोड़
कर
के
लबों
से
चूम
कर
बटवे
में
अपने
तिरी
तस्वीर
रक्खी
मोड़
कर
के
- jaani Aggarwal taak
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हमने
अच्छी
धाँक
जमा
रक्खी
थी
अपनी
फिर
उसने
छोड़ा
और
सब
पानी
कर
डाला
Prashant Sharma Daraz
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कहते
भी
हैं
कि
हम
सेे
मुहब्बत
नहीं
उन्हें
और
अब
तलक
रखी
है
निशानी
सँभाल
कर
Divy Kamaldhwaj
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
Nadir Ariz
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और
आसान
नहीं
हो
सकता
फ़रियादों
को
पूरा
करना
एक
ही
आस
लगा
रक्खी
है,
ख़ुदा
सभी
बन्दों
ने
तुझ
सेे
Siddharth Saaz
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बना
रक्खी
हैं
दीवारों
पे
तस्वीरें
परिंदों
की
वगर्ना
हम
तो
अपने
घर
की
वीरानी
से
मर
जाएँ
Afzal Khan
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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नादानी
ये
ज़रा
सी
ले
ले
न
जान
मेरी
फूलों
से
भर
रखी
है
मैंने
मयान
मेरी
हैं
आपको
जो
शिकवे
मेरी
ज़बान
से
जाँ
तो
काट
लें
लबों
से
अपने
ज़बान
मेरी
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vivek sahu
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याद
तो
होंगी
वो
बातें
तुझे
अब
भी
लेकिन
शेल्फ़
में
रक्खी
हुई
बंद
किताबों
की
तरह
Parveen Shakir
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
रास्ता
ख़त्म
मकानों
के
तजावुज़
से
हुआ
मैंने
जब
नक़्शा
बनाया
था
गली
रक्खी
थी
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Nadir Ariz
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हवाओं
की
तरह
घेरे
रहोगे
तुम
भला
हम
से
जुदा
कैसे
रहोगे
तुम
ये
पहली
मर्तबा
मैं
जान
पाया
हूँ
हमेशा
ज़ख़्म
इक
गहरे
रहोगे
तुम
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jaani Aggarwal taak
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मुझे
भी
घर
बसाना
चाहिए
था
किसी
से
दिल
लगाना
चाहिए
था
कई
बारी
किया
इज़हार
उसने
मुझे
भी
मान
जाना
चाहिए
था
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jaani Aggarwal taak
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किसी
ने
किसी
से
रचाई
थी
शादी,
कहीं
इश्क़
अपना
भी
हारा
किसी
ने
jaani Aggarwal taak
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गर्दिशों
में
हैं
सितारे
ज़िन्दगी
हम
तो
हैं
तेरे
सहारे
ज़िन्दगी
यार
धन
दौलत
बता
क्या
चीज़
है
नाम
कर
दी
है
तुम्हारे
ज़िन्दगी
मौत
का
तो
डर
कभी
था
ही
नहीं
इश्क़
के
चक्कर
में
हारे
ज़िन्दगी
आँख
भर
के
एक
बारी
देख
लूँ
पास
जितनी
है
हमारे
ज़िन्दगी
जानता
हूँ
इश्क़
भी
है
इक
जुआ
कोई
जीते
कोई
हारे
ज़िन्दगी
इस
क़दर
बैठा
हूँ
मैं
इक़
आस
में
अब
कोई
आए
सुधारे
ज़िन्दगी
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jaani Aggarwal taak
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बड़ी
दिल-फेंक
है
दिलदार
है
वो
फ़क़त
ख़ंजर
नहीं
तलवार
है
वो
कोई
जन्मों
के
वादे
कर
गया
था
मगर
अब
बाल-बच्चे
दार
है
वो
ख़बर
जो
दुश्मनों
को
दे
रहा
है
हमीं
में
से
कोई
ग़द्दार
है
वो
मिरी
आँखों
को
पढ़ना
जानती
है
मिरी
माँ
है
मिरा
संसार
है
वो
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jaani Aggarwal taak
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