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Irshad Siddique "Shibu"
she'r jo tujhko kahe the ham manaane ke li.e
she'r jo tujhko kahe the ham manaane ke li.e | शे'र जो तुझको कहे थे हम मनाने के लिए
- Irshad Siddique "Shibu"
शे'र
जो
तुझको
कहे
थे
हम
मनाने
के
लिए
शे'र
वो
अब
पढ़
रहे
हैं
हम
कमाने
के
लिए
- Irshad Siddique "Shibu"
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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बे-गिनती
बोसे
लेंगे
रुख़-ए-दिल-पसंद
के
आशिक़
तिरे
पढ़े
नहीं
इल्म-ए-हिसाब
को
Haidar Ali Aatish
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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एक
ग़ज़ल
से
जिसकी
मूरत
मैंने
आज
बनाई
है
एक
दफ़ा
जो
वो
पढ़
ले
तो
प्राण
प्रतिष्ठा
हो
जाए
Tanoj Dadhich
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चुपके
चुपके
वो
पढ़
रहा
है
मुझे
धीरे
धीरे
बदल
रहा
हूँ
मैं
Aziz Nabeel
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मेरे
अश'आर
पढ़ने
वाले
लोग
तेरी
तस्वीर
माँग
बैठे
हैं
Shadab Javed
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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इक
और
किताब
ख़त्म
की
फिर
उस
को
फाड़
कर
काग़ज़
का
इक
जहाज़
बनाया
ख़ुशी
हुई
Ameer Imam
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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त्यौहारों
में
भी
मिलते
हैं
वो
ग़ैरों
की
तरह
इक
घर
में
रहते
हैं
पर
इक
साथ
नहीं
रहते
Irshad Siddique "Shibu"
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कि
इतनी
नफ़रतों
का
क्या
करोगे
आप
मोहब्बत
को
भी
थोड़ी
सी
जगह
दीजे
Irshad Siddique "Shibu"
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मौला
पूरी
मेरी
एक
दु'आ
कर
दे
मेरी
माँ
को
मेरी
उम्र
अता
कर
दे
Irshad Siddique "Shibu"
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जो
मेरे
नाम
से
तज़ईन
होगी
तो
उसकी
ज़िन्दगी
रँगीन
होगी
अगर
हम
बोल
दे
लानत
जो
उसको
तो
फिर
लानत
की
ये
तौहीन
होगी
लगेगी
क़ब्र
हिन्दुस्तां
से
मेरी
तिरंगे
की
जो
गर
तक़्फीन
होगी
यक़ीनन
ईद
होगी
मेरी
उस
दिन
दु'आ
में
जो
तिरी
आमीन
होगी
जो
मेरी
याद
आए
रो
ले
देना
कहीं
तब
दर्द
में
तस्कीन
होगी
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चंद
पैसे
क्या
कमाने
लग
गए
लोग
आलिम
को
पढ़ाने
लग
गए
जान
जिनपे
हम
लुटाने
लग
गए
वो
भी
हमको
ही
मिटाने
लग
गए
वो
हमेशा
से
जो
मेरे
पास
था
उसको
पाने
में
ज़माने
लग
गए
जिनके
आँसू
पोछे
मैंने
आँखों
के
वो
मुझे
आँखें
दिखाने
लग
गए
बाप
का
सर
से
जो
साया
क्या
उठा
ग़म
के
साए
हक़
जताने
लग
गए
रस्ता
जिनको
भी
बताया
मैंने
वो
मुझको
ही
रस्ता
दिखाने
लग
गए
ख़ुद
को
अब
भी
ढूँढने
में
हूँ
लगा
दोस्त
सब
मेरे
कमाने
लग
गए
वो
जो
मेरे
क़त्ल
के
साज़िश
में
थे
मुझ
को
देखा
मुस्कुराने
लग
गए
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