dil se guftagoo | "दिल से गुफ़्तगू"

  - Deepandru Singh
"दिलसेगुफ़्तगू"
तेरीइबादतोंमेंआजकलनज़रआतेहैं,
कुछफ़ासलेतोहैंपरथोड़ाक़रीबआतेहैं,
येइंसानतेरेहरएकदुखकोसाथसहताहैं,
आजयहदिलकुछकहताहै
तेरीबातोंमेंहीहमखोएरहतेहैं,
शहरआपकाहैऔरहमआबादहोतेहैं
शामकोयहआफ़ताबतेरेचाँदकेनूरकेसामनेरोज़झुकताहैं,
आजयहदिलकुछकहताहै
हमारीमोहब्बतहैजोतूबे-फज़ूलबेवजहनाचतीरहतीहै,
तेरेमिलनेसेहमारीभीसाँसेंलड़-खड़ाजातीहैं,
दूरसेदेखकरहीतुझपेयहदिलरोज़मरताहै,
आजयहदिलकुछकहताहै
अभीइसवक़्तकीख़ामोशीकोज़रारमज़ानसमझलो,
फिरबादमेंथोड़ाप्यारसेईदमनाएँगे
वैसेआजकलतुझसेेबेइंतेहाँमोहब्बतकरनेमेंअच्छालगताहै,
आजयहदिलकुछकहताहै
  - Deepandru Singh
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