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Hasan Raqim
tu salaamat rahe aur rahe pur-sukoon teri miTTi karodon ki hai aabroo
tu salaamat rahe aur rahe pur-sukoon teri miTTi karodon ki hai aabroo | तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरू
- Hasan Raqim
तू
सलामत
रहे
और
रहे
पुर-सुकूँ,
तेरी
मिट्टी
करोड़ों
की
है
आबरू
इस
ज़मीं
के
हैं
हम
इस
में
मिल
जाएँगे,
पर
रहेगा
हमेशा
वतन
मेरे
तू
- Hasan Raqim
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पारा-ए-दिल
है
वतन
की
सर
ज़मीं
मुश्किल
ये
है
शहर
को
वीरान
या
इस
दिल
को
वीराना
कहें
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Majrooh Sultanpuri
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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ज़हर
खा
खा
कर
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
आजकल
ज़िंदगी
तुझ
सेे
किनारा
कर
रहे
हैं
आजकल
तू
बहुत
ही
दिलनशीं
है,
महजबीं
है
तू
मगर
तुझको
अपनाकर
ख़सारा
कर
रहे
हैं
आजकल
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Hameed Sarwar Bahraichi
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मुसलसल
तजरबों
का
है
नतीजा
मैं
दरया
से
किनारा
हो
गया
हूँ
Madan Mohan Danish
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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खाक
हो
जाएँगे
हम
खाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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वो
मेरे
बाद
सभी
का
ही
हो
गया
देखो
मैं
जिसके
बाद
किसी
और
का
हुआ
ही
नहीं
Hasan Raqim
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रास्ता
दिल
का
ज़रा
गुलज़ार
भी
हो
और
मंज़िल
ढूँढ़ना
दुश्वार
भी
हो
सादगी
से
यूँँ
गुज़र
जाए
ये
जीवन
एक
प्याली
चाय
भी
हो
यार
भी
हो
वो
तुम्हारे
पास
आकर
बैठता
हो
ये
ज़रूरी
तो
नहीं
ना
प्यार
भी
हो
इश्क़
भी
हो
और
हो
इज़हार
यानी
पेड़
साया
भी
करे
फलदार
भी
हो
कोई
दरिया
देखकर
गोता
लगाए
कोई
पत्थर
आसमाँ
के
पार
भी
हो
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Hasan Raqim
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साथ
उसके
इक
नया
रिश्ता
निभाने
के
लिए
याद
रक्खेंगे
उसे
लेकिन
भुलाने
के
लिए
Hasan Raqim
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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क्या
क्या
है
मुझको
प्यार
से
शिकवा,
सुनाऊँगा
इक
दिन
मैं
दिल
की
बात
उसे
जा
सुनाऊँगा
Hasan Raqim
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