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Kumar gyaneshwar
sukhun ki badhawasi maar daalegi
sukhun ki badhawasi maar daalegi | सुख़न की बदहवा सेी मार डालेगी
- Kumar gyaneshwar
सुख़न
की
बदहवा
सेी
मार
डालेगी
मुझे
तो
ये
उदासी
मार
डालेगी
यूँँ
मेरा
हाल
हर
इक
से
न
पूछा
कर
कि
तुझको
ग़म-शनासी
मार
डालेगी
किसी
को
झूठे
अंदाज़ों
से
मरना
है
किसी
को
ख़ुश-क़यासी
मार
डालेगी
मोहब्बत
दिल
से
करने
वालों
को
इक
दिन
बदन
की
बे-लिबासी
मार
डालेगी
तिरे
बारे
में
जितना
जानता
हूँ
अब
कि
मुझको
ख़ुद-शनासी
मार
डालेगी
- Kumar gyaneshwar
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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आँसुओं
में
मिरे
काँधे
को
डुबोने
वाले
पूछ
तो
ले
कि
मिरे
जिस्म
का
सहरा
है
कहाँ
Pallav Mishra
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इश्क़
को
पूछता
नहीं
कोई
हुस्न
का
एहतिराम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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जिस्म
चादर
सा
बिछ
गया
होगा
रूह
सिलवट
हटा
रही
होगी
Kumar Vishwas
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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दो
आँखें
हैं
दो
पलकें
हैं
जबीं
है
चूमने
ख़ातिर
बहुत
से
ज़ाविए
हैं
उस
बदन
में
देखने
लायक
Siddharth Saaz
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अगर
ये
आख़री
है
ईद
तो
ख़ुदा
मुझको
गले
लगाए
वो
और
ईद
ये
मुबारक
हो
Kumar gyaneshwar
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जिसको
कहते
रहे
हम
यार
हमारा
होगा
उसकी
तस्वीर
से
आगे
का
गुज़ारा
होगा
मैं
ये
अब
शर्त
लगा
सकता
हूँ
उसके
जानिब
है
ये
मुमकिन
नहीं
वो
शख़्स
तुम्हारा
होगा
लौट
के
आना
है
उसको
कभी
लेकिन
मैंने
साफ
कह
देना
है
कुछ
भी
न
दुबारा
होगा
जंग
इक
जीत
के
जो
लौटा
हूँ
दरिया
से
मैं
अब
तो
हर
सम्त
किनारा
ही
किनारा
होगा
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Kumar gyaneshwar
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करता
भी
और
क्या
ज़िन्दगी
में
लगता
है
बस
ये
मन
शा'इरी
में
इस
सेे
अच्छा
तो
तुम
इश्क़
करते
क्या
मिला
तुमको
यूँँ
ख़ुद-कुशी
में
एक
औरत
ही
बस
जानती
है
राज़
ख़ुश
होने
का
बेबसी
में
कोई
राधा
या
मीरा
से
पूछे
कटते
हैं
कैसे
दिन
आशिक़ी
में
एक
माँ-
बाप
जिसके
अलावा
छोड़
जाते
हैं
सब
मुफ़्लिसी
में
तुम
मोहब्बत
का
मतलब
यूँँ
समझो
राम
का
रोना
उस
बेकली
में
इश्क़
उन
लड़कियों
से
भी
क्या
जो
पास
आती
नहीं
तिश्नगी
में
मैं
उसे
दोस्त
कहता
नहीं
अब
शर्त
जिसने
रखी
दोस्ती
में
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Kumar gyaneshwar
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बदन
से
रूह
की
ऐसे
रिहाई
का
मतलब
बता
रहा
था
वो
मुझको
जुदाई
का
मतलब
उसे
ही
देखने
के
बाद
दोस्त
मुमकिन
है
कि
अहल-ए-दुनिया
ने
जाना
दिखाई
का
मतलब
पिता
का
बन
के
सहारा
यूँँ
एक
लड़की
ने
बताया
सबको
ही
अपनी
पढ़ाई
का
मतलब
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Kumar gyaneshwar
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सीखनी
है
अब
तेरे
जैसी
ही
अदा
मुझको
लोग
ख़ामख़ा
ही
कहते
हैं
जाँ
बुरा
मुझको
तुम
से
इश्क़
में
बस
ये
फ़ायदा
हुआ
है
अब
लोग
दे
रहे
हैं
हर
बात
पर
दु'आ
मुझको
यार
सारे
मेरे
ये
पूछते
हैं
कैसा
हूँ
बस
ये
दिल
ही
टूटा
है
और
क्या
हुआ
मुझको
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Kumar gyaneshwar
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