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Subrat Tripathi
vo kahaanii munhjubaani yaad ab tak hai ha
vo kahaanii munhjubaani yaad ab tak hai ha | वो कहानी मुँहजुबानी याद अब तक है हमें
- Subrat Tripathi
वो
कहानी
मुँहजुबानी
याद
अब
तक
है
हमें
जो
हमारे
होंठ
पर
थे
होठ
रख
तुमने
कहें
- Subrat Tripathi
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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बड़े
ताबाँ
बड़े
रौशन
सितारे
टूट
जाते
हैं
सहर
की
राह
तकना
ता
सहर
आसाँ
नहीं
होता
Ada Jafarey
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चश्म
हो
तो
आईना-ख़ाना
है
दहर
मुँह
नज़र
आता
है
दीवारों
के
बीच
Meer Taqi Meer
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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आधी
रात
की
चुप
में
किस
की
चाप
उभरती
है
छत
पे
कौन
आता
है
सीढ़ियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
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एक
दुख
ये
के
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
के
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
Tehzeeb Hafi
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इस
लिए
रौशनी
में
ठंडक
है
कुछ
चराग़ों
को
नम
किया
गया
है
Tehzeeb Hafi
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कहा
था
तैश
में
आकर
कि
मुझको
भूल
जा
तू
कहाँ
तक
शा'इरी
से
ज़िंदगी
गुज़रे
समझ
ना
Subrat Tripathi
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एक
हमीं
तेरे
अपने
हैं,
बाकी
सब
बेगाने
है
एक
हमीं
में
पागलपन
है,
बाकी
सब
दीवाने
है
Subrat Tripathi
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ख़ुदा
की
दी
हुई
नेमत
लकीरें
हाथ
में
सब
है
तुम्हीं
को
छोड़कर
के
बस
हमारे
साथ
में
सब
है
कहे
थे
हाथ
मेरे
देखकर
के
इक
नज़ूमी
ने
कि
मेरे
भाग्य
में
कुछ
भी
नहीं
पर
हाथ
में
सब
है
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Subrat Tripathi
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किए
थे
पाप
जितने
भी
बुरे
सदक़ा
उतारा
था
हज़ारों
मुश्किलों
की
जद
में
रिश्ता
हमारा
था
गिरे
थे
भाव
सोंनें
और
चाँदी
के
मिनट
भर
में
उसनें
जब
भरी
बाज़ार
में
झुमका
उतारा
था
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Subrat Tripathi
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कोई
मुखड़ा
नहीं
जचता
कोई
तुम
सेा
नहीं
लगता
तुम्हारे
बिन
मुझे
कोई
सफ़र
अच्छा
नहीं
लगता
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Subrat Tripathi
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