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Gulshan Panwar
jo luti ek beti kii izzat yahaan
jo luti ek beti kii izzat yahaan | जो लुटी एक बेटी की इज़्ज़त यहॉं
- Gulshan Panwar
जो
लुटी
एक
बेटी
की
इज़्ज़त
यहॉं
वो
ख़बर
बन
गई
आज
अख़बार
की
- Gulshan Panwar
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मुझको
ख़बर
हुई
न
लहद
आ
गई
क़रीब
किस
तर
हाँ
बढ़
रही
है
ये
रफ़्तारें
ज़िंदगी
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''Akbar Rizvi"
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तेरे
आने
की
जब
ख़बर
महके
तेरी
खुश्बू
से
सारा
घर
महके
Nawaz Deobandi
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हम
दो
बंदे
हैं
और
सिगरेट
एक
अब
ख़बर
होगी
दोस्ती
की
दोस्त
Muzdum Khan
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जिसने
भी
इस
ख़बर
को
सुना
सर
पकड़
लिया
कल
एक
दिए
ने
आंधी
का
कॉलर
पकड़
लिया
Munawwar Rana
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ग़म
में
हम
सूरत-ए-गमख़ार
नहीं
पढ़ते
हैं
इसलिए
मीर
के
अश'आर
नहीं
पढ़ते
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
तस्वीर
से
जा
लगती
हैं
सुब्ह
उठकर
सभी
अख़बार
नहीं
पढ़ते
हैं
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Ashu Mishra
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किसे
ख़बर
वो
मोहब्बत
थी
या
रक़ाबत
थी
बहुत
से
लोग
तुझे
देख
कर
हमारे
हुए
Ahmad Faraz
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तुम
न
आए
तो
क्या
सहर
न
हुई
हाँ
मगर
चैन
से
बसर
न
हुई
मेरा
नाला
सुना
ज़माने
ने
एक
तुम
हो
जिसे
ख़बर
न
हुई
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Mirza Ghalib
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किसी
से
इश्क़
करना
और
इस
को
बा-ख़बर
करना
है
अपने
मतलब-ए-दुश्वार
को
दुश्वार-तर
करना
Abbas Ali Khan Bekhud
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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तूफ़ान
की
उम्मीद
थी
आँधी
नहीं
आई
वो
आप
तो
क्या
उस
की
ख़बर
भी
नहीं
आई
शायद
वो
मोहब्बत
के
लिए
ठीक
नहीं
था
शायद
ये
अँगूठी
उसे
पूरी
नहीं
आई
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Khurram Afaq
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यूँॅं
ही
नहीं
ये
क़िस्सा
मशहूर
हो
गया
क़िस्से
में
हीर
से
राँझा
दूर
हो
गया
Gulshan Panwar
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डर
ठीक
है
पर
इतना
डरना
तो
ग़लत
है
ना
गर
हाथ
न
पकड़ूँ
तो
वो
सोने
से
डरता
है
Gulshan Panwar
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कि
उसकी
याद
में
प्यारा
तराना
भूल
आया
हूँ
उसी
के
वास्ते
यारों
ज़माना
भूल
आया
हूँ
वही
पागल
बनाता
है
वही
पागल
बताता
है
मैं
इक
वो
नाम
जो
दिल
से
मिटाना
भूल
आया
हूँ
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Gulshan Panwar
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कि
उसके
होंठ
से
नज़रें
हटानी
पड़
गई
हमको
हमारी
भी
सुनो
भारी
जवानी
पड़
गई
हमको
अकेला
एक
दिल
लेकर
मुहब्बत
क्या
करोगे
तुम
यहाँ
तो
जान
की
बाज़ी
लगानी
पड़
गई
हमको
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Gulshan Panwar
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वो
जो
छुप-छुप
के
सनम
बात
किया
करता
था
जाग
कर
साथ
मिरे
रात
किया
करता
था
जो
नज़र
तक
न
मिलाता
था
वो
मिलने
पर
भी
ख़्वाबों
में
मुझ
से
मुलाक़ात
किया
करता
था
तू
भी
मायूस
है
दुनिया
की
परेशानी
से
ठीक
था
तू
जो
सवालात
किया
करता
था
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Gulshan Panwar
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